गैंगस्टर विकास दुबे के खजांची जय बाजपेई के गिरोह में शामिल 17 अपराधियों और सफेदपोश लोगों की सूची अधिवक्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट सौरभ भदौरिया ने ईडी को सौंप दी है। साथ ही जय के काले कारनामों पर पर्दा डालने और संरक्षण देने वाले 16 पुलिसकर्मियों के नाम भी उजागर किए।
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गैंगस्टर विकास दुबे और जय बाजपेई
- फोटो : अमर उजाला
ईडी ने जय के सभी सहयोगियों के नाम, पते व उनकी संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज एक माह में सौंपने को कहा है। बयान में सौरभ ने कहा कि जय एक संगठित गिरोह चलाता है, जो सफेदपोश नेताओं, दबंगों और कुछ अफसरों के संरक्षण में फलता-फूलता रहा।
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विकास दुबे एनकाउंटर
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जिसने भी आवाज उठाने की कोशिश की, उसे झूठे मुकदमों में फंसा दिया गया। सौरभ ने आरोप लगाया कि जय ने विकास के करोड़ों रुपये ब्याज पर बंटवाए। कई नामी-बेनामी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की। कई बड़े व्यापारियों, उद्योगपतियों व राजनेताओं की संपत्तियों में भी जय और विकास का हिस्सा है।
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कानपुर एनकाउंटर
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सौरभ ने अपने बयान में दो आईपीएस, एक पीपीएस सहित दर्जनभर थानेदारों के नाम उजागर किए। कहा कि ये लोग परोक्ष या अपरोक्ष रूप से विकास दुबे एंड कंपनी को संरक्षण देते रहे हैं। आरोप लगाया कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस सिर्फ दबिश के नाम पर खानापूरी कर रही है। बजरिया थाने में जय बाजपेई के खिलाफ दर्ज मुकदमे में पिता का घरेलू नाम बब्बू बाजपेई दर्ज कर खेल किया गया, जिससे कानूनी रूप से जय को बचाया जा सके।
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कानपुर एनकाउंटर में आठ पुलिसकर्मी शहीद, मौके पर एडीजी एलओ प्रशांत कुमार
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सौरभ ने कहा कि पहले भी कई बार शिकायतें की गईं, जांचें भी हुईं लेकिन अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट दबा दीं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी तीन अगस्त 2019 को जय मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की गई थी लेकिन अफसरों में गहरी पैठ के चलते यह कार्रवाई भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
सौरभ ने आरोपों से संबंधित दस्तावेज, संपत्तियों की रजिस्ट्रियां, डीएम व डीआईजी द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट की प्रतियां भी ईडी अफसरों को सौंपी। सौरभ का कहना है कि एसआईटी में वे पहले ही बयान दर्ज करा चुके हैं। गुरुवार को दोबारा बुलाया गया है। जय, उसके परिजनों व करीबियों के अलावा संरक्षण देने वाले पुलिसकर्मियों से संबंधित दस्तावेज भी एसआईटी के जांच अधिकारियों को सौंपेंगे।