विकास दुबे के खजांची जय बाजपेयी पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। पुलिस उसका पासपोर्ट और असलहा लाइसेंस निरस्त करा सकती है। एक पुरानी जांच में उसके खिलाफ आरोप सही पाए गए हैं। यह फाइल अब भी एसएसपी कार्यालय में ही अटकी हुई है। इसे निकलवाकर कार्रवाई की तैयारी है। जांच में जय के पासपोर्ट और असलहा लाइसेंस पर भी सवाल उठाए गए हैं।
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जय बाजपेई
- फोटो : अमर उजाला
विकास दुबे का खजांची जय बाजपेई ने दबंगई और रौब गांठने के लिए अपने साथ एक फर्जी होेमगार्ड को गनर बनाकर रखा था। इसकी जानकारी होने पर हल्का इंचार्ज ने सिर्फ गनर के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट दाखिल कर दी थी। जय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार वर्ष 2017 में जय ने अपने साथ चकेरी के पीएसी लाइन निवासी महेंद्र सिंह यादव को बतौर गनर रखा था।
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kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
वह होमगार्ड विभाग से गनर मिलने की बात कहता था। महेंद्र की वर्दी पर लगी नेम प्लेट में पीएनओ नंबर 41950122226 लिखा था। जय ने मोहल्ले के राजकुमार प्रजापति की लाइसेंसी रिवाल्वर भी महेंद्र को दे रखी थी। इलाकाई लोगों के जानकारी देने पर तत्कालीन थाना प्रभारी रमेश चंद्र मिश्रा ने एसआई तनवीर अहमद को जांच सौंपी।
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kanpur encounter
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होमगार्ड विभाग से जय के झूठ का पता चलने पर एसआई ने जय बाजपेई के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की थी। 22 जुलाई 2017 को महेंद्र के खिलाफ सरकारी वर्दी पहनने और दूसरे की रिवाल्वर लेकर चलने के मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। बता दें कि विकास दुबे का खजांची जय बाजपेई फर्जी होमगार्ड को मित्र का लाइसेंसी रिवाल्वर देकर साथ लेकर चलता था।
इस मामले में दोषी पाए जाने पर तत्कालीन डीएम रौशन जैकब ने जय के रिवाल्वर का लाइसेंस निरस्त कर दिया था। इसके बाद जय ने तत्कालीन कमिश्नर से मिलकर अपना लाइसेंस बहाल करा लिया था। इसका खुलासा एसएसपी द्वारा थाना प्रभारी से मांगी गई रिपोर्ट में हुआ है। जय बाजपेई अपने करीबियों के शस्त्र लेकर चलकर भी भौकाल झाड़ता था। ऐसे करीबियों की कुंडली भी पुलिस खंगाल रही है जो जय को अपने शस्त्र दिया करते थे।