विकास दुबे के पंजीकृत गिरोह डी-124 में खजांची जय बाजपेई और उसके भाइयों का नाम भी शामिल किया गया है। वहीं मुठभेड़ में विकास के मारे जाने के बाद उसका नाम गिरोह से हटा दिया गया है। पुलिस अब नए गैंग लीडर के लिए अधिक आपराधिक मामलों वाले उसके गुर्गों की हिस्ट्री खंगाल रही है।
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विकास दुबे कांड में क्यों आया जय की पत्नी का नाम
- फोटो : amar ujala
डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि विकास के गैंग में एक दर्जन गुर्गों को शामिल किया गया था। बिकरू कांड के बाद एनकाउंटर में मारे गए विकास और उसके पांच साथियों के नाम हटा दिए गए हैं। जय उसके भाइयों अजय, रजय और शोभित समेत अब तक गिरोह में 25 लोगों के नाम दर्ज हो चुके हैं।
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विकास दुबे: जय की पत्नी श्वेता
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विकास दुबे के खजांची जय बाजपेई की हिस्ट्रीशीट नजीराबाद थाने में खोली गई थी। विभिन्न थानों में उसके खिलाफ 11 मुकदमे दर्ज हैं। पांच मुकदमे वर्ष 2020 में दर्ज हुए हैं। हिस्ट्रीशीट बताती है कि जय का आपराधिक इतिहास दस साल पुराना है। वर्ष 2010 में जय के खिलाफ डकैती का पहला मुकदमा दर्ज हुआ था।
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विकास दुबे कांड
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इसका खुलासा अधिवक्ता सौरभ भदौरिया द्वारा आईजीआरएस पर की गई शिकायत का निस्तारण करने वाली नजीराबाद इंस्पेक्टर ज्ञान सिंह की रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया कि जय के खिलाफ एससीएसटी एक्ट, 7 सीएलए, गैंगस्टर, आर्म्स एक्ट, बलवा, मारपीट, धोखाधड़ी समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। इनमें नजीराबाद और बजरिया थाने में चार-चार, काकादेव में दो तथा चौबेपुर में एक मुकदमा दर्ज किया गया है।
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जय के कई नेताओं से भी हैं संबंध
- फोटो : अमर उजाला
2012 व 2016 में बजरिया में बलवा, मारपीट, 2017 में नजीराबाद थाने में केडीए की सील तोड़कर अवैध निर्माण का मुकदमा, 2018 में नजीराबाद थाने में एससीएसटी एक्ट व सेवन सीएलए समेत बलवा, मारपीट आदि धाराओं में दो मुकदमे दर्ज हुए थे।
बता दें कि कानपुर के बिकरू गांव में दो जुलाई की रात को आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मुख्य आरोपी विकास दुबे के खजांची जय बाजपेई को पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। जांच के दौरान जय बाजपेई के बिकरू कांड में शामिल होने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। प्रशासन एक के बाद एक कर उसकी सभी संपत्तियों को सीज कर रहा है।