दहशतगर्द विकास दुबे को नेताओं का संरक्षण था। शहर के विधायकों से लेकर ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधान तक उसका साथ देते थे। ये खुद विकास दुबे का कबूलनामा है। माननीय जांच और सवालों के घेरे में आ गए हैं।
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विकास दुबे
- फोटो : amar ujala
2017 का एक वीडियो वायरल हुआ है। तब एसटीएफ ने उसको गिरफ्तार कर पूछताछ की थी। विकास दुबे से एसटीएफ अफसर ने पूछा कि किसपे दबाव बना रहे थे तो विकास कहता है कि वो दबाव नहीं बनवा रहा था।
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हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
वो निर्दोष था, इसलिए विधायक भगवती प्रसाद सागर, अभिजीत सिंह सांगा, ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधानों ने पुलिस से विकास के पक्ष में पैरवी की थी।
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पूर्व सांसद राजा राम पाल के साथ विकास दुबे
- फोटो : amar ujala
वायरल मीडिया में वो कहता है कि उसको हत्या की घटनाओं में साजिश के तहत फंसाया गया। इसलिए उसका नाम बाहर हुआ था। विकास के कबूलनामे से कई माननीय भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।
राजनीतिक शरण ही ली
जिस तरह से विकास का सफेदपोशों से संबंध है और वो उसको बचाते रहे हैं, उससे इसकी आशंका बढ़ गई है कि इस बार भी उसने राजनीतिक शरण ही ली है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक पहले उसको शहर और फिर बाद में अन्य शहरों के नेताओं ने शरण दी।