बिकरू कांड में आरोपी खुशी तिवारी पर पुलिस ने गुरुवार को आठ और धाराएं बढ़ा दीं। गुरुवार को उसे बाराबंकी से लाकर माती स्थित किशोर न्याय बोर्ड में पेश किया गया। इसके पहले पुलिस ने खुशी को हत्या समेत 9 धाराओं में आरोपित किया था।
अब और साक्ष्य मिलने का हवाला देकर विस्फोटक अधिनियम समेत आठ धाराओं में आरोपित किया है। अब कुल 17 धाराओं में नाबालिग खुशी आरोपित है। सुनवाई के बाद बाल संरक्षण गृह बाराबंकी भेज दिया। दो जुलाई को बिकरू गांव में विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर हमला किया गया था।
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अमर दुबे और खुशी
- फोटो : अमर उजाला
इसमें सीओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। मामले में पुलिस ने कुख्यात अमर दुबे की कथित पत्नी खुशी को भी आरोपी बनाया है। वह करीब दो माह माती जेल में रही। जांच में उसके नाबालिग होने की पुष्टि हुई। इसके बाद उसे बाराबंकी बालिका संरक्षण गृह भेजा गया था।
पुलिस ने खुशी को पहले हत्या, हत्या के प्रयास, बलवा, लूट समेत नौ धाराओं में आरोपित किया था। गुरुवार को विवेचक कृष्ण मोहन राय ने और साक्ष्य मिलने का हवाला देकर विस्फोटक अधिनियम समेत आठ धाराएं बढ़ा दीं।
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खुशी के साथ विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
खुशी को बाराबंकी से पेशी पर माती किशोर न्याय बोर्ड लाया गया था। खुशी के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि खुशी के पास से कोई बरामदगी नहीं हुई।
पुलिस पूरे घटनाक्रम में उसकी कोई भूमिका तय नहीं कर पाई है। इसके बावजूद पुलिस मनमाने तरीके से उसे आरोपित करती जा रही है। घटना के बाद खुशी को कुख्यात अपराधियों के साथ आरोपी बनाए जाने पर शुरू से ही सवाल उठाए जा रहे हैं।
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शादी में डांस करती खुशी
- फोटो : अमर उजाला
कोर्ट ने तीन दिन के अंदर विवेचक से मांगे साक्ष्य
बिकरू कांड में आरोपी बनाई गई खुशी तिवारी को किशोर न्याय बोर्ड नाबालिग घोषित कर चुका है। अब उसके पिता श्याम लाल तिवारी ने अधिवक्ता शिवाकांत त्रिपाठी के माध्यम से कोर्ट को पत्र देकर खुशी को अमर दुबे की पत्नी का नाम दिए जाने पर आपत्ति जताई है।
खुशी के अधिवक्ता ने अपनी दलील रखते हुए कहा कि अगर खुशी नाबालिग है तो उसकी शादी वैध नहीं हो सकती है। ऐसे में पुलिस उसे अमर दुबे की पत्नी का दर्जा कैसे दे सकती है। बता दें कि खुशी पर वह सभी धाराएं लगाई गई हैं जो विकास दुबे समेत उसके गुर्गों पर लगाई गई हैं।
इस पर उसके अधिवक्ता ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि खुशी की भूमिका पुलिस अभी तय नहीं कर पाई है। साथ ही उसके पास से कोई बरामदगी भी नहीं है। ऐसे में नाबालिग को इतने गंभीर आरोपों में कैसे आरोपित कर दिया गया। इस पर कोर्ट ने विवेचक कृष्ण मोहन राय से तीन दिन के अंदर साक्ष्य मांगे हैं।
मां को देखकर बुरी तरह से बिलख पड़ी खुशी
बाराबंकी से खुशी को माती स्थित किशोर न्याय बोर्ड लाने की जानकारी पर उसकी मां व पिता भी वहां पहुंच गए थे। उन्होंने करीब तीन महीने बाद बेटी को देखा। खुशी अपने माता-पिता को देखकर बुरी तरह से बिलखने लगी। वहीं, उसके माता-पिता भी बुरी तरह से रोने लगे।
उन्होंने बेटी से उसकी तबियत के बारे में पूछा। बता दें कि खुशी को माती जेल में रहने के दौरान तबियत बिगड़ गई थी। बताते हैं कि उसे खून की उल्टियां हुई थीं। तीनों को बिलखता देख वहां मौजूद लोगों ने उन्हें समझाकर शांत कराया। खुशी के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने उन्हें कोर्ट पर भरोसा रखने व हर हाल में न्याय दिलाने की बात कह सांत्वना दी।