चित्रकूट से सोमवार रात को एसटीएफ के हत्थे चढ़ा विकास दुबे का गुर्गा बाल गोविंद दुबे वहां के कुंज बिहारी आश्रम में डेरा डाले था। बिकरू कांड (दो जुलाई) के एक सप्ताह बाद वह चित्रकूट पहुंचा था। आश्रम की साफ-सफाई के अलावा वह साधु, संतों की सेवा करता था। इसके बदले उसे रहने और खाने को मिल जाता था।
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विकास दुबे का साथी बालगोविंद
- फोटो : amar ujala
बिकरू कांड के आरोपियों का चित्रकूट कनेक्शन शुरू से ही रहा है। शशिकांत पांडेय भी कई दिन चित्रकूट में डेरा जमाए रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बदमाशों के कई कारखास इन्हीं इलाकों में रहते हैं। इसलिए कई आरोपियों ने यहां पनाह ली। बाल गोविंद भी चित्रकूट पहुंचा था। पास के ही बाजार से भगवा गमछा और कपड़े खरीदकर संत के वेष में आश्रम गया था।
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विकास दुबे का साथी बालगोविंद
- फोटो : अमर उजाला
आश्रम तक पहुंचाने वाले की तलाश
आमतौर पर किसी आश्रम में पहुंचकर कोई भी शख्स आसानी से नहीं रह सकता। आश्रम के लोग उसके बारे में जानकारी जुटाते हैं। तभी उसको रखते हैं। इसलिए पुलिस और एसटीएफ उस कनेक्शन की तलाश कर रही है, जिसने बाल गोविंद को आश्रम पहुंचाया। शुरुआती जांच में एक स्थानीय शख्स का नाम सामने आया है। चित्रकूट पुलिस भी इस संबंध में इनपुट जुटा रही है।
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विकास दुबे फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
मध्यप्रदेश जाने की फिराक में था
एसटीएफ और पुलिस का मूवमेंट शुरू से ही चित्रकूट की तरफ रहा है। शशिकांत के पकड़े जाने के बाद एसटीएफ ने वहां डेरा जमा दिया था। बाल गोविंद को शक हो गया था कि शायद वो पकड़ जाएगा। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि वह जल्द से मध्यप्रदेश जाने वाला था। ग्वालियर, उज्जैन या अन्य किसी धार्मिक स्थल पर शरण लेने की योजना थी।
ऐसे पकड़ा गया बाल गोविंद
वारदात के बाद से बाल गोविंद मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर रहा था। अपने परिचितों या राह चलते लोगों से मोबाइल पर बातचीत कर रहा था। सूत्रों के मुताबिक उसने एक साधु के मोबाइल से परिजनों को फोन किया। एसटीएफ पहले उस तक पहुंची, जहां से बाल गोविंद का सुराग लगा और वो धरा गया।