दो जुलाई की रात कानपुर जिले के बिकरू में पुलिस पर किए गए हमले में पहली गोली विकास दुबे ने अपनी राइफल से चलाई थी। आसपास के मकान की छतों से ताबड़तोड़ गोलियां चलने लगीं। रात करीब एक बजे गोलीबारी शुरू हुई और आधा घंटे तक गोलियां चलती रहीं। इस बात का खुलासा चौबेपुर में तैनात रहे सिपाही विकास सुधाकर ने बयान में किया है। इस बयान को पुलिस ने चार्जशीट का हिस्सा बनाया है।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
विकास ने कहा है कि वे लोग लोग चौबेपुर एसओ विनय तिवारी की प्राइवेट स्कार्पियो से दबिश बिकरू गए थे। बेला क्रॉसिंग पर सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा, शिवराजपुर एसओ महेश यादव व बिठूर एसओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह पुलिस बल के साथ मिले।
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सीओ ने दबिश के लिए तीन पार्टियां बनाई थीं। वह तीसरी पार्टी में विनय तिवारी के साथ था। विकास के पश्चिमी गेट वाले भाग को घेरना था। रास्ते में खड़ी जेसीबी पार करके जैसे ही विकास के मकान को घेरने पहुंचे विकास ने पुलिसकर्मियों पर गोली चला दी। पुलिस ने जवाबी फायरिंग की।
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फाइल फोटो
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कड़ी सुरक्षा में माती कोर्ट लाई गई खुशी
कानपुर। बिकरू कांड की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल होने के बाद मंगलवार को खुशी को कड़ी सुरक्षा में बाराबंकी से किशोर न्याय बोर्ड माती लाया गया। न्यायाधीश के ट्रेनिंग पर होने के चलते सुनवाई नहीं हो सकी। अगली सुनवाई 13 अक्तूबर को होगी।
अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि पहले धारा 167 सीआरपीसी के तहत 14-14 दिन के लिए खुशी का वारंट चल रहा था। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद धारा 309 सीआरपीसी के तहत अन्य आरोपियों की तरह खुशी का भी वारंट बनाया गया है।