फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Vikas Dubey Encounter: एक पर चढ़ा कफन, सौ के राज दफन

Sat, 11 Jul 2020 04:35 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 6
kanpur encounter - फोटो : amar ujala
यूपी एसटीएफ ने विकास दुबे को मुठभेड़ में ढेर कर दिया और दहशतगर्द विकास दुबे के खात्मे के साथ ही तमाम राज भी दफन हो गए। वह जिंदा रहता तो प्रदेश और देश के कई बड़े नेता (अलग-अलग पार्टियों के), अफसर, कारोबारी और नामचीन हस्तियां बेनकाब होतीं। अपराधियों से इनके गठजोड़ की गांठें भी खुलतीं। इन्हीं लोगों की सरपरस्ती में विकास दुबे खूंखार अपराधी बना। हत्या, हत्या के प्रयास, लूट समेत सौ से अधिक केस उस पर हुए।
 
विज्ञापन

2 of 6
Kanpur encounter - फोटो : अमर उजाला
जेल जाता रहा, बेल मिलती रही। वर्ष-1990 में अपराध जगत में उतरने के साथ ही उसे सियासी सरपरस्ती मिलने लगी थी। डेढ़ दशक तक वो ग्राम प्रधान रहा। आज भी प्रधानी उसके घर में ही है। उसने अपनी सियासी पारी की शुरुआत बसपा से की। करीब 15 साल तक बसपा से जुड़ा रहा। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य भी रहा। बसपा सुप्रीमो से लेकर पार्टी के कई बड़े नेताओं से उसका सीधा संपर्क रहा।

 
विज्ञापन

3 of 6
kanpur encounter - फोटो : amar ujala
इसके बाद सपा और भाजपा नेताओं के संपर्क में आ गया। भाजपा के दो विधायक उसके बेहद करीबी हैं। इस बात का खुलासा खुद उसने एक साक्षात्कार में किया था। पार्टी के एक सांसद भी उसके रुतबे के कायल रहे। चुनाव हो या किसी अन्य मामले में समर्थन की जरूरत, तो ये सभी जनप्रतिनिधि विकास की चौखट जरूर पहुंचते।

 

4 of 6
kanpur encounter - फोटो : amar ujala
कुछ यही हाल समाजवादी पार्टी के नेताओं और जनप्रतिनिधियों का रहा है। विधायकों से लेकर प्रदेश स्तर तक के पदाधिकारी तक विकास दुबे के करीबी रहे। विकास जो कहता था, वो ये करते थे। पार्टी में फंड भी देता था। जिले के दो सपा विधायकों से भी उसकी नजदीकियां चर्चा में रहीं। सोशल मीडिया पर उनकी फोटो भी वायरल हो चुकी है। 

 
विज्ञापन

5 of 6
kanpur encounter - फोटो : amar ujala
विकास राजनीति में सक्रिय रहा। पार्टी कोई भी हो, उसका मकसद राजनीति को अपने अपराधों की ढाल बनाना था। इलाके में दहशत कायम की, जिससे वोट बैंक बनाया और उसी बल पर पार्टियों से डील करता रहा। राजनीति से जुड़े पुराने लोग बताते हैं कि विकास बसपा सुप्रीमो मायावती से सीधे मिलता था। इससे उसकी हनक का अंदाजा लगाया जा सकता था।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
kanpur encounter - फोटो : amar ujala
विकास ने अपने इलाके के दो दर्जन गांवों में दहशत फैला रखी थी। वो जो कहता था, ग्रामीण वही करते थे। ग्राम प्रधान कौन बनेगा, ये भी वही तय करता था। जब विधायकी और सांसदी का चुनाव होता था तो जिसे वो समर्थन देता था, इन गांवों का वोट एकजुट उसी को जाता था। इसलिए नेता भी नतमस्तक रहते थे।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें