विकास दुबे को गुरुवार सुबह उज्जैन के महाकाल मंदिर प्रांगण से गिरफ्तार किया गया है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि विकास लखनऊ से जिस गाड़ी पर सवार होकर एमपी पहुंचा उसकी नम्बर प्लेट पर हाई कोर्ट लिखा हुआ है। गाड़ी किसी मनोज यादव के नाम पर रजिस्टर्ड है। शायद यही वजह कि उसे बाॅर्डर पार करने में कोई दिक्कत नहीं हुई। वहीं वकील की पत्नी का कहना है कि मेरा और मेरे परिवार का विकास दुबे से दूर दूर तक कोई संबंध नहीं है। अब असलियत क्या है ये तो जांच के बाद ही सामने आएगा।
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Kanpur Encounter Case
- फोटो : amar ujala
आठ पुलिस कर्मियों की मौत का जिम्मेदार विकास उज्जैन पुलिस के हाथ बड़ी आसानी से आ गया। पहले तो पुलिस को यकीन ही नहीं हुआ कि ये वहीं विकास दुबे है जिसने कानपुर में पुलिस कर्मियों पर घेर कर गोलियों की बौछार की थी। जिसमें आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए। जिसके बाद से विकास फरार चल रहा था।
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kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
कानपुर एनकाउंटर में आठ पुलिस कर्मियों की मौत के जिम्मेदार कुख्यात विकास दुबे को एमपी पुलिस ने उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया है। मंदिर प्रांगण में पहुंचे एक शख्स ने मंदिर के अंदर घुसने के बाद चिल्ला चिल्लाकर खुद को विकास दुबे बताया तो वहां हड़कंप मच गया। मंदिर के गेट पर खड़े गार्ड ने फौरन पुलिस को इसकी सूचना दी जिसके बाद उसे हिरासत में लिया गया है।
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- फोटो : amar ujala
कुख्यात विकास को पकड़ने के लिए उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, और मध्य प्रदेश में अलर्ट जारी किया गया था लेकिन विकास इतना शातिर है कि सात दिनों तक सात राज्यों की पुलिस को गुमराह करता रहा। विकास को पकड़ने के लिए कानपुर के चालीस थानों की फोर्स, दस हजार पुलिसकर्मी और यूपी एसटीएफ की सौ से अधिक टीमें, साथ ही प्रदेश का खुफिया विभाग उसकी तलाश करता रहा लेकिन इन सब को गच्चा देकर वो मध्य प्रदेश भाग निकला और फिर बड़ी आसानी से पुलिस की गिरफ्त में आ गया।
सबसे मजे की बात ये कि विकास कानपुर एनकाउंटर की घटना को अंजाम देने के बाद वो घटनास्थल से महज पांच किमी दूर शिवली गांव में दो दिन छिपा रहा और पुलिस पूरे प्रदेश में उसे ढूंढती रही। घटना के पांच दिन तक विकास कहां है किसी को पता नहीं था। विकास की आखिरी लोकेशन पुलिस ने औरैया में ट्रेस की थी। इसके बाद विकास का मोबाइल ऑफ हो गया। इस दौरान विकास के उन्नाव, कानपुर देहात, मेरठ, दिल्ली फिल्म सिटी, नेपाल बॉर्डर सहित कई जगहों पर मिलने की आशंका में पुलिस दबिश देती रही।