बिकरू गांव में विकास दुबे ने एनकाउंटर की रात अपने भाई दीपक दुबे की सेमी आटोमेटिक राइफल से पुलिस पर गोलियां चलाई थीं। एनकाउंटर में आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। एसटीएफ के मुताबिक राइफल सत्यवीर के रिश्तेदारों ने खरीदी है। हालांकि खरीदने वाले तक अभी नहीं पहुंचा जा सका है। वहीं जो राइफल बरामद हुई है, उसकी बट काटकर छोटी की गई है। ताकि रखने में आसानी हो।
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विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
रात भर मोर्चा ले सकते थे बदमाश
एसटीएफ के मुताबिक बदमाशों के पास असलहा और कारतूसों का बहुत बड़ा जखीरा था। 134 कारतूस इनके पास से बरामद हुए हैं, जबकि सैकड़ों राउंड फायरिंग कर चुके थे। तमाम असलहों और सैकड़ों कारतूसों का अभी पता नहीं चल सका है। एसटीएफ के अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह का भंडारण था, उससे वे रातभर पुलिस से मोर्चा ले सकते थे। एक-दो कंपनी पीएसी भी कम पड़ जाती।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
गन हाउस मालिक रडार पर, मोबाइल से खुलेगा राज
शिव तिवारी और दीपक दुबे के पास राइफल का लाइसेंस था। इन्होंने सामान्य राइफल के बजाय सेमी आटोमेटिक राइफल खरीदीं। एसटीएफ के मुताबिक ये राइफल सिर्फ राज्यपाल की अनुमति से दी जाती हैं। ऐसे में राइफल देने वाला गन हाउस मालिक भी सवालों के घेरे में है। विकास, अमर और प्रभात के मोबाइलों के लॉक खुलने के बाद कई और राज खुलेंगे।
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विकास दुबे गैंग के सात मददगार गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
सात एफआईआर दर्ज हुईं
सभी आरोपी पनकी से गिरफ्तार किए गए। लिहाजा एसटीएफ ने पनकी थाने में केस दर्ज कराए हैं। पनकी एसओ अतुल कुमार सिंह ने बताया कि सात असलह बरामद हुए हैं। इसलिए सात रिपोर्ट दर्ज की गई हैं। कई और नामजद व अज्ञात भी आरोपी हैं। आर्म्स एक्ट समेत तमाम गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।