उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के बिकरू कांड की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग को अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने एक और शपथ पत्र सौंपा है। शिकायत के बाद भी कई पुलिस, प्रशासनिक अफसरों व नेताओं के अलावा विकास दुबे व उसके खजांची जय बाजपेई के गैंग से जुड़े लोग एसआईटी रिपोर्ट में कार्रवाई से बच गए थे। इन सभी के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने न्यायिक आयोग को शपथ पत्र सौंपा है।
विज्ञापन
2 of 7
Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
सौरभ का कहना है कि आयोग ने उन्हें गवाह बनाकर बयान दर्ज कराने के लिए अगले सप्ताह बुलाया है। सौरभ ने साल 2016 से 2020 तक कानपुर में तैनात रहे एसएसपी, एसपी पश्चिम, सीओ नजीराबाद व सीओ एलआईयू की गहनता से जांच की मांग की। शपथपत्र में कहा कि बिकरू कांड के बाद विकास को भगाने में जिन वाहनों का इस्तेमाल हुआ, वह जय ने अपने खास लोगों के नाम पर खरीदीं थीं। जांच में इनके नाम सामने आने के बावजूद इन्हें षड्यंत्र का आरोपी नहीं बनाया गया।
विज्ञापन
3 of 7
kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
विकास, जय व उनके गिरोह के सदस्यों के शस्त्र लाइसेंस बनवाने के लिए कई विधायकों, मंत्रियों ने भी सिफारिशी पत्र दिए थे। इन्हें भी शामिल नहीं किया गया। सौरभ ने मांग की कि विकास के गैंग को संरक्षण देकर अंकूत संपत्ति बनाने वाले छह आईपीएस, आठ पीपीएस सहित सभी पुलिसकर्मियों पर विजिलेंस एवं आर्थिक अपराध शाखा एजेंसी मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करे।
4 of 7
kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
साजिश के तहत छीनी सुरक्षा
सौरभ ने कहा कि उनकी शिकायतों पर कई जांच हुईं। इनमें आरोप साबित होने पर कार्रवाई की संस्तुति भी हुई लेकिन बाद में उल्टा उन्हें व उनके परिवारवालों को ही झूठे मुकदमों में फंसा दिया गया। साजिश के तहत सुरक्षा छीन ली गई ताकि आसानी से हत्या कराई जा सके। सौरभ ने खुद पर दर्ज मुकदमों की केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग भी की।
विज्ञापन
5 of 7
kanpur encounter news
- फोटो : amar ujala
अफसरों ने भुगता कार्रवाई का खामियाजा
विकास दुबे, जय व उनके गिरोह पर जिस अफसर ने भी कार्रवाई की कोशिश की उसे प्रताड़ित किया गया। उन्हें साइड पोस्टिंग दी गईं। इनमें कन्नौज के एएसपी रहे केसी गोस्वामी, बजरिया एसओ धीरेंद्र सिंह चौहान व नजीराबाद एसओ आमोद कुमार सिंह के नाम प्रमुख हैं। इस तथ्य को भी जांच में शामिल करने की मांग की।
विज्ञापन
6 of 7
Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
विधायक व वरिष्ठ आईएएस के संरक्षण में चला खेल
सौरभ ने बिकरू कांड को सुनियोजित साजिश बताते हुए इसमें आईपीएस व पीपीएस अफसरों के अलावा कई पुलिसकर्मियों के शामिल होने की बात कही। कहा कि प्रदेश के एक विधायक व वरिष्ठ आईएएस अफसर इन्हें संरक्षण दे रहे थे। इनके कई ऑडियो-वीडियो क्लिप आयोग को सौंपे जा चुके हैं। इन पर लगे आरोपों व संपत्तियों की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराई जाए। साजिश में शामिल लोगों का नारको, ब्रेन मैपिंग व लाई डिटेक्टर टेस्ट भी कराए जाएं।
चुनाव में धन के बदले विकास को मिलता था संरक्षण
विकास जय के माध्यम से कई नेताओं की संपत्तियों में रुपया लगाया था। जिसके प्रमाण सौरभी ने जांच एजेंसियों को दिए लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। चुनावों में विकास इन नेताओं की आर्थिक मदद करता था, बदले में नेता उसे संरक्षण देते थे।