बिकरू कांड में मंगलवार को दाखिल की गई पूरक चार्जशीट में मनु पांडेय का जिक्र तक नहीं है, जबकि पहली चार्जशीट में पुलिस ने ही उसके खिलाफ साक्ष्य मिलने का दावा कर जांच जारी रहने की बात कही थी। अब उसका नाम हटाने से पुलिस पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
विज्ञापन
2 of 5
विकास दुबे और मनु पांडेय की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
कहीं पुलिस मनु को क्लीन चिट देकर गवाह बनाने की तैयारी में तो नहीं है। हालांकि जानकारों का कहना है कि मनु की जो भूमिका है और जो उसके खिलाफ साक्ष्य हैं, उससे उसको गवाह बनाना संभव नहीं है। पुलिस ने माती कोर्ट में उमाशंकर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
विज्ञापन
3 of 5
विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
हाल में गिरफ्तार किए गए विपुल दुबे के खिलाफ जांच के बाद चार्जशीट लगाई जाएगी। मगर पूरी चार्जशीट में मनु का नाम नहीं है। उसमें न तो यह लिखा है कि मनु को क्लीन चिट दे दी गई है और न ही यह स्पष्ट किया है कि उसके खिलाफ जांच जारी है।
4 of 5
विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे में सवाल उठता है कि मनु को लेकर पुलिस बैकफुट पर क्यों है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (कॉल रिकॉर्डिंग) होने के साथ-साथ उसके घर के आंगन में सीओ को मारा गया और वह पुलिस को गुमराह करती रही। इसके बावजूद पुलिस ने उसे आरोपी नहीं बनाया।
जिनके खिलाफ सिर्फ कहानी, वो जेल में बंद
पुलिस ने बिकरू कांड में नाबालिग खुशी दुबे, रेखा, शांति समेत चार महिलाओं को जेल भेजा है। पुलिस के पास केवल इन सभी के खिलाफ आरोपों की कहानी है। किसी पर ललकारने तो किसी पर वारदात के वक्त कारतूस देने का दावा है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के नाम पर कुछ खास नहीं है, फिर भी सभी को जेल भेज दिया था। जिसके खिलाफ साक्ष्य हैं, वह अभी भी सलाखों के बाहर है।