बिकरू कांड के बाद उज्जैन से पकड़े गए विकास दुबे ने अपने विरोधियों को फंसाने का प्रयास किया था। कानपुर लाए जाने के दौरान उसने बताया था कि कानपुर देहात में एक अग्निहोत्री परिवार के यहां उसने शरण ली थी। बाद में पता चला कि अग्निहोत्री परिवार से उसकी रंजिश चलती थी इसलिए उनका नाम लिया। प्रभात मिश्रा ने भी पुलिस और एसटीएफ को गुमराह किया था। अब जब असल में दहशतगर्दों को शरण देने वालों की गिरफ्तारी हुई, तो इसका खुलासा हुआ।
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विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विकास ने बताया था कि अग्निहोत्री परिवार के यहां वह अमर दुबे व प्रभात के साथ ठहरा था। वहीं प्रभात ने पूछताछ में किसी और का नाम लिया था। करीब एक महीने पहले एसटीएफ कानपुर यूनिट ने इन दोनों के बयान पढ़े। दोनों के बयान अलग-अलग होने की वजह से एसटीएफ को शक हो गया। टीम पहले से भी मददगारों व सेमी आटोमेटिक राइफलों (30 स्प्रिंग फील्ड राइफल) की तलाश कर रही थी।
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विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
सूत्रों के अनुसार इस बीच अमर, विकास व प्रभात में से किसी एक का मोबाइल ऑन हुआ। इसके बाद एसटीएफ सक्रिय हुई और सर्विलांस की मदद से प्रभात के शिवली निवासी दोस्त विष्णु कश्यप को उठाया। इसके बाद मददगारों और असलहा खरीदार को दबोचा गया। विकास व प्रभात का मोबाइल विष्णु के पास था, जबकि अमर दुबे का मोबाइल शुभम के पास से बरामद हुआ है।
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विकास दुबे: कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
अग्निहोत्री परिवार को उठा लाई थी एसटीएफ
एसटीएफ की टीम सबसे पहले कानपुर देहात निवासी अग्निहोत्री परिवार को उठाकर लाई थी। उनसे पूछताछ की। मोबाइल नंबरों की सीडीआर खंगाली लेकिन कुछ नहीं मिला। तब एसटीएफ को पता चला कि अग्निहोत्री परिवार की विकास दुबे से रंजिश चलती थी। लिहाजा उसे फंसाने के लिए विकास ने साजिश रची।
पहले ही रच ली थी गुमराह करने की साजिश
एसटीएफ के मुताबिक जिस तरह से दोनों बदमाशों ने पूछताछ में अलग-अलग ठिकाने बताए। इससे पूरी आशंका है कि पहले ही इन सभी ने तय कर लिया था कि जब भी पुलिस वाले पूछताछ करेंगे तो अपने विरोधियों को फंसाएंगे। वरना अलग-अलग पूछताछ में भी दोनों अलग-अलग नाम न बताते।