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वैलेंटाइन डे स्पेशल: इश्क तो सब करते हैं पर इन्होंने जो किया वो मोहब्बत सदियों तक याद रखी जाती है

Fri, 15 Feb 2019 02:37 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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रूस्तम सिंह
इश्क तो सब करते हैं। कोई पत्नी से करता है कोई अपनी प्रेमिका से करता है कोई अपने परिवार से करता है लेकिन हम आप को ऐसे इश्क के बारे में बताने जा रहे हैं जो सात जन्मों ने सदियों तक याद रखा जाता है। ‘है प्रीत जहां की रीति सदा’ इस गाने का अर्थ यूं तो इश्क, मोहब्बत और चाहत को ही दर्शाता है, लेकिन यह प्यार किसी युवक युवती के प्रति नहीं बल्कि अपने देश की मिट्टी से जुड़ा है।

शायद यही वजह है कि आज भी हमारे बीच कुछ ऐसे लोग मौजूद है, जो अपना वैलेंटाइन किसी व्यक्ति विशेष को नहीं बल्कि अपने वतन को ही मानते हैं और उसे इस कदर प्यार करते हैं कि उसकी सेवा के लिए अपने साथ साथ बेटों को भी लगा देते हैं।

 
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डेमो
ऐसे ही हैं डकोर ब्लाक के गुढ़ा निवासी रिटायर्ड सूबेदार (आनरी कैप्टन) वीरेंद्र सिंह। जिन्होंने न सिर्फ कारगिल में ही पाकिस्तान के दांत खट्टे कर सीओएएस सम्मान प्राप्त किया बल्कि अब उनके दोनों बेटे भी देश की सेवा में जम्मू कश्मीर की सीमा पर दुश्मनों के आगे चट्टान से डटे हैं। वीरेंद्र सिंह फौज से सेवानिवृत्त होने के बाद आज खेती किसानी कर रहे हैं, लेकिन उनके दोनों जवान बेटे राजपूत रेजीमेंट में हवलदार मनु प्रताप सिंह और नायक हवलदार रुस्तम सिंह जम्मू कश्मीर में तैनात होकर दुश्मनों की बुरी नजर से मातृ भूमि की रक्षा कर रहे हैं।

 
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मनु प्रताप
वीरेंद्र का कहना है कि उन्हें तो फक्र है कि उनके और भी बेटे होते तो उन्हें वे देश सेवा में लगाते, क्योंकि देश से बढ़कर न तो माता पिता है और न ही जमीन जायदाद। जिसे अपने वतन से मोहब्बत नहीं वह किसी इंसान से भी मोहब्बत करने के लायक नहीं है।

 

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डेमो
मनु और रुस्तम दोनों को ही बचपन से देश प्रेम की शिक्षा दी, जिसका नतीजा है कि आज वे देश की सेवा में लगकर न सिर्फ उनके कुनबे का बल्कि पूरे गांव का मान बढ़ा रहे हैं। वीरेंद्र ने बताया कि मुझे और मेरे बच्चों को देश प्रेम के लिए समर्पित करने में पत्नी उर्मिला की भी सराहनीय भूमिका है, जिन्होंने हम सभी के भीतर देश प्रेम का जज्बा भरा और पति के बाद दोनों कलेजों के टुकड़ों को भी वतन की सेवा के लिए समर्पित कर दिया।

 
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डेमो
बड़े बेटे मनु का परिवार उसकी पत्नी ज्योति और तीन बच्चे फतेहगढ़ में है। छोटे बेटे रूस्तम की भी इसी साल अप्रैल में शादी है, तभी हमारा पूरा परिवार एकत्र होगा। वीरेंद्र के परिवार को देखकर हर गांव वाला भी यह कहते नहीं थकता है कि यह है देश के प्रति असल मोहब्बत।
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