स्कूल में खड़े बच्चे
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पेंटर को बुलाकर योजना समझाई और कार्य शुरू करा दिया। इस कार्य में पंचायत सचिव रामपाल से भी योगदान लिया गया। जब स्कूल भवन रंग-पुतकर तैयार हुआ तो देखने वाले दंग रह गए। दूर से देखने पर लगता है जैसे कि स्कूल भवन नहीं बल्कि, ट्रेन की बोगी खड़ी है। स्कूल भवन के नए लुक को देखने के लिए आसपास के ग्रामीण और स्कूलों के शिक्षक भी आ रहे हैं।