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PHOTOS: दरोगा जी को लोगों ने वर्दी में बनाया दूल्हा, बैंडबाजे के साथ निकली बरात तो ठहर गई हर नजर

Fri, 12 Jul 2019 02:11 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात
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बग्घी पर वर्दी में दूल्हे की तरह सजधज कर बैठे थानेदार - फोटो : अमर उजाला
सजी हुई घोड़े की बग्घी और बैंड बाजे के साथ आपने बरातें तो बहुत देखी होंगी पर हमेशा दूल्हा ही नजर आया होगा। इस बग्घी पर फूलों की माला पहने ये कोई दुल्हा नहीं कानपुर देहात के मंगलपुर थाने के प्रभारी तुलसीराम पाण्डेय हैं। अब आप ये सोच रहे होंगे कि आखिर इनको बग्घी में बैठाकर लोग नगाड़े की धुन पर नाच क्यों रहे हैं।
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बग्घी में बैठे दरोगा जी - फोटो : अमर उजाला
इस खुशी और थानेदार के बग्घी में बैठने के बारे में बताते हैं। दरअसल इनका मंगलपुर थाने से ट्रांसफर हो गया है, और लोगाें ने इनकी विदाई पूरे रीति रिवाज और बैंडबाजे के साथ उनकी बारात निकाल कर की | वर्दी में दुल्हा बने दरोगा को देखकर हर कोई हैरान था। मंगलपुर से रसूलाबाद के थानेदार बनाए गए तुलसीराम पांडेय को स्थानीय लोगों ने गुरुवार को अनोखे अंदाज में विदाई दी।
 
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पूरे इलाके में दरोगा जी को बग्घी पर बैठाकर घुमाया गया - फोटो : अमर उजाला
फूलमाला पहनाकर बग्घी में बैठाने के बाद पूरे कस्बे में गाजे-बाजे संग घुमाया। रास्ते भर लोगों ने जगह-जगह फूलमालाएं पहनाईं। 27 मई 2018 को तुलसीराम पांडेय ने मंगलपुर थाना प्रभारी का पद संभाला था। पद संभालने के बाद उन्होंने इलाके में अपराधियों पर नकेल कसी। साथ ही एक अनूठी पहल की शुरुआत की, जिसने उन्हें क्षेत्रवासियों का चहेता बना दिया।

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दरोगा जी की विदाई की बरात में कारों का भी रहा काफिला - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कस्बे के गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए हरसंभव मदद की। कोचिंग की व्यवस्था कराने के साथ ही वक्त निकालकर वह खुद भी बच्चों को पढ़ाने पहुंच जाते थे। उनके इसी सरल स्वभाव का नतीजा था कि क्षेत्र का छोटा हो बड़ा, अपनी बात कहने से कभी नहीं हिचका। कानपुर देहात से पूर्व वह कानपुर के मूलगंज, बर्रा और बिठूर थाने के प्रभारी रहे।
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दरोगा जी की विदाई में लोगाें ने डीजे पर डांस भी किया - फोटो : अमर उजाला
कानपुर में तैनाती के दौरान भी वह गुझिया बैंक और बिठूर में थानेश्वर मंदिर की स्थापना को लेकर चर्चा में रहे थे। दीपावली पर गरीबों को पैसे बांटने के लिए उन्होंने गुझिया बैंक तैयार किया था। इस पहल के लिए अफसरों ने भी उनकी पीठ थपथपाई थी। बिठूर थाने में थानेश्वर मंदिर की स्थापना से वे काफी चर्चित हुए। उनकी विदाई में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हुए। भावुकता में कुछ लोगों की आंखों से आंसू भी छलक आए।
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