दरोगा जी की विदाई की बरात में कारों का भी रहा काफिला
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उन्होंने कस्बे के गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए हरसंभव मदद की। कोचिंग की व्यवस्था कराने के साथ ही वक्त निकालकर वह खुद भी बच्चों को पढ़ाने पहुंच जाते थे। उनके इसी सरल स्वभाव का नतीजा था कि क्षेत्र का छोटा हो बड़ा, अपनी बात कहने से कभी नहीं हिचका। कानपुर देहात से पूर्व वह कानपुर के मूलगंज, बर्रा और बिठूर थाने के प्रभारी रहे।