औरैया जिले में दिबियापुर के सेहुद गांव में गुरुवार को हुई दिल दहला देने वाली घटना में फिलहाल पति-पत्नी में आपसी विवाद और मुकदमेबाजी की वजह सामने आ रही है। बताते हैं कि आठ साल के वैवाहिक जीवन में शादी के एक वर्ष बाद ही दोनों में विवाद शुरू हो गया।
इसके चलते साधना देवी अधिकांश समय मायके में ही रही। आठ साल में बामुश्किल चार साल ही दोनों साथ रहे। वहीं, यह बात भी पता चली है कि शादी के लिए रिश्ता आने पर पंडितों ने कुलदीप व साधना के नाम का मिलान किया तो शादी का योग ही नहीं बन रहा था। इस पर कुलदीप के दूसरे नाम गजेंद्र के नाम से मिलान करने पर विवाह का योग बना।
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बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
कुलदीप के मुताबिक अमानपुर सहायल निवासी साधना देवी से उसका ब्याह 12 फरवरी 2012 में हुआ था। शादी के एक साल के अंदर ही साधना की सास-ससुर से नहीं पटी। इस पर वह अपने माता-पिता से अलग पत्नी के साथ रहने लगा।
वर्ष 2013 में आपसी विवाद एवं मनमुटाव न्यायालय तक पहुंच गया। उसके पिता कैलाश ने विदाई का केस दायर किया। वहीं, पत्नी की ओर से मेंटीनेंस का मुकदमा दायर किया गया। इसके बाद पत्नी साधना ने दहेज एक्ट का मुकदमा लगाया।
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मौके पर पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
इस बीच कई बार समझौता हुआ और पत्नी साथ रही, लेकिन मनमुटाव खत्म नहीं हुआ। अक्तूबर 2019 को पत्नी साधना ने फोन कर पति के साथ रहने की इच्छा जाहिर की। इस पर 11 अक्तूबर 2019 को वह पत्नी साधना को लेकर कचहरी में वकील के पास पहुंचा। वकील के समक्ष कुछ गवाहों की मौजूदगी में समझौता हो गया।
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घर के बाहर लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद पत्नी के साथ वह अपने घर पर रह रहा था। कुलदीप के अनुसार 10 सितंबर को सबसे छोटी बेटी के जन्म के बाद वह अपनी सास को अमानपुर से ले आया था। वह पिछले सप्ताह ही घर से गई थीं। इस एक साल तक हल्की फुल्की नोकझोंक तो हुई। परंतु कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ, जिससे बात आत्महत्या तक पहुंचती। कुलदीप ने हत्या की बात सिरे से खारिज की।
अपनी किस्मत को कोस रहा कुलदीप
गुरुवार को हुई घटना के बाद कुलदीप अपनी किस्मत को कोसता नजर आया। बताया कि वर्ष 2012 में शादी के लिए साधना देवी का रिश्ता आया था। पंडितों से नाम मिलान कराया तो उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में शादी का योग नहीं बन रहा। इस पर उसने शादी करने से इनकार कर दिया था। ससुराल वालों और माता-पिता की इच्छा से उसके दूसरे नाम गजेंद्र कुमार के नाम से मिलान कराया गया। गजेंद्र के नाम से साधना और उसकी शादी का योग बन गया। इस पर शादी हो गई। परंतु उसे यह नहीं पता था कि इस शादी का यह अंजाम होगा।