कानपुर के रेउना के कई युवकों ने साइबर अपराध का तरीका तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात में रहकर सीखा। वहां कई वारदातों को अंजाम देने के बाद गांव में ट्रेनिंग सेंटर खोल लिया। गिरोह में युवकों के साथ 50 से अधिक उम्र के लोगों को शामिल किया गया। इसके बाद सभी की जिम्मेदारी तय कर दी गई।
साइबर अपराधियों के गिरोह में शामिल ठग पांचवीं से 11वीं पास हैं लेकिन उनके बातचीत करने का तरीका ऐसा था कि लोग प्रभावित हो जाएं। धमकी देने का स्टाइल किसी अधिकारी से कम नहीं है। कॉल करने के लिए ठगों ने म्यूल नंबर और म्यूल बैंक खाते रखे हुए थे। उन्हीं नंबरों पर ऑनलाइन रुपयों का ट्रांजेक्शन करवाते थे।
कानपुर के एडीसीपी एसओजी सुमित सुधाकर रामटेके ने बताया कि रेउना में साइबर अपराधियों का गिरोह काफी समय से इस कार्य से जुड़ा हुआ है। पिछले एक साल से ज्यादा सक्रिय था। एक के बाद एक कई वारदात अंजाम दीं। गिरोह के 10 सदस्यों को कॉल करने की जिम्मेदारी दी जाती थी। सभी अलग-अलग कोनों में बैठकर कॉल करते थे जबकि अन्य लोगों की जिम्मेदारी क्षेत्र की निगरानी की रहती थी।
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रेउना थाना क्षेत्र के राठिगांव, समाजनगर, लक्ष्मणपुर बड़ेला गांव से गिरफ्तार किए गए 20 साइबर ठग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कुछ लोग गांव के थोड़ी दूरी पर मौजूद रहते थे। अगर कोई पुलिसवाला या सरकारी गाड़ी दिखाई देती थी तो तुरंत सूचना देते । पुलिस को मुखबिरों ने इसकी जानकारी दी जिसके लिए पहले से एहतियात रखा गया। फोर्स काफी दूरी पर रहा और ड्रोन से निगरानी की गई। साइबर अपराधी जैसे ही अपने कार्य में व्यस्त हुए टीम ने दबिश दे दी।
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रुपयों की निकासी के सभी एप की जानकारी
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों को बैंक एप समेत रुपयों की निकासी के सभी तरीकों की जानकारी थी। ठग कॉल उठाने और बोलने वाले का तरीका देखकर उसे ठगी की साजिश में फंसाते थे। अगर कोई उम्र दराज बुजुर्ग या हल्की आवाज वाला युवक कॉल उठाता तो उसको पेंशन स्कीम, बिजली बिल में छूट, कृषि बीमा के लाभ की बात बताई जाती थी।
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उससे कहा जाता था कि आपके आधार नंबर को स्कीम में पंजीकृत कर दिया गया है। इसके लिए रकम लगेगी। शुरुआत में छोटी रकम ठगी जाती जिससे शक न हो सके। आवास के लिए 11 हजार रुपये तक मांगा करते थे। अश्लील वीडियो देखने के मामले में आरोपियों ने 11 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक बैंक खातों में मंगवाए गए।
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कोई सवाल-जवाब करता तो सायरन बजाते
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि साइबर अपराधी फर्जी क्राइम ब्रांच या अन्य पुलिस अधिकारी बनकर बातचीत करते थे। अगर कोई सवाल-जवाब या अर्दब में लेने की कोशिश करता था तो दूसरे सदस्य पुलिस सायरन बजाकर गिरफ्तार करने की धमकी देते थे। कई बार दूसरा सदस्य वरिष्ठ अधिकारी बनकर बात करता था। उनका कहना था कि पुलिस तुम्हें पकड़ने के लिए निकल चुकी है। अगर बचना चाहते हो तो जमानत की राशि दे दो वरना गिरफ्तार कर दिल्ली ले जाया जाएगा।
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तमिलनाडु और महाराष्ट्र में तरीका सीख गांव में खोला ट्रेनिंग सेंटर
कानपुर के रेउना के कई युवकों ने साइबर अपराध का तरीका तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात में रहकर सीखा। वहां कई वारदातों को अंजाम देने के बाद गांव में ट्रेनिंग सेंटर खोल लिया। गिरोह में युवकों के साथ 50 से अधिक उम्र के लोगों को शामिल किया गया। इसके बाद सभी की जिम्मेदारी तय कर दी गई।
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रेउना थाना क्षेत्र के राठिगांव, समाजनगर, लक्ष्मणपुर बड़ेला गांव से गिरफ्तार किए गए 20 साइबर ठग
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पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि रेउना क्षेत्र के गिरोह में शामिल 34 शातिरों में से 12 के खिलाफ पूर्व में एफआईआर दर्ज हो चुकी है। यह प्राथमिकी दूसरे शहरों में हुई है। आरोपी तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात की कई फैक्टरियों में काम करने के लिए गए थे। वहां उनकी जान पहचान वहां सक्रिय साइबर अपराधियों से हुई। उन्होंने इनका उपयोग उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश के लोगों को ठगने के लिए किया।
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आरोपियों को टेलीकॉलिंग में लगाया गया। उनसे हिंदी में बातचीत कराई गई। कभी गांव का रिश्तेदार बनकर आर्थिक सहयोग मांगा तो कभी ओटीपी पूछने का काम दिया गया। इस तरह रेउना क्षेत्र के युवक ठगी की साजिश रचने में पारंगत हो गए। वहां के गिरोह की धरपकड़ हुई तो दूसरे शहर में चले गए। साइबर क्राइम ब्रांच की सख्ती को देखते अपने गांव आ गए। गांव में दूसरे लोगों को भी जोड़ लिया। उनको रोजगार का सपना दिखाकर कॉल करने के काम में लगाया।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
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पुलिस कमिश्नर के सामने किया लाइव
पुलिस आरोपियों को पकड़कर पुलिस कमिश्नर कार्यालय लेकर आई। यहां पर कुछ आरोपियों को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के सामने पेश किया गया। दो आरोपियों ने आवास विकास का अधिकारी बनकर कॉल किया। उनके तरीके और आत्मविश्वास को देखकर हर कोई हैरान रह गया। पुलिस ने शातिरों को फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर रेंडम कॉल करने के लिए कहा। आरोपियों ने पुलिस के सामने लाइव वारदात की। हालांकि, ठगी करने के पहले ही फोन कट कर दिया गया।