उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का नाम इन दिनों पूरे देश में छाया हुआ है। वजह है एक सत्ता धारी बाहुबली नेता की एक आम परिवार से राजनीति को लेकर शुरु हुई दुश्मनी की जो हर दिन के साथ बढ़ती और जानलेवा होती गई। इसमें दुष्कर्म भी हुआ, हत्या भी हुई और सड़क हादसे में भी लोग मारे गए। सत्ता के लिए शुरु हुई इस दुश्मनी में एक परिवार के चार लोग काल के गाल में समा गए लेकिन इंसाफ की लड़ाई जारी रही। उन्नाव जिले की ये कहानी आपको किसी बॉलीवुड थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लगेगी।
आगे की स्लाइड में ः कैसे 15 सालों में एक बाहुबली विधायक से हुई एक सामान्य परिवार की जंग
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कुलदीप सिंह सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली किशोरी (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
विधायक कुलदीप सिंह पर रेप का आरोप लगाने वाली पीड़िता लखनऊ ट्रामा सेंटर में आठ दिनों से जिंदगी-मौत से लड़ रही है। रविवार को चाचा महेश से मिलने जा रही पीड़िता की कार को ट्रक ने टक्कर मार दी थी। जिसमें पीड़िता के परिवार की चाची व मौसी की मौत हो गई। बीते 15 सालों में पीड़िता के परिवार की यह चौथी मौत थी, जिसमें विधायक कुलदीप सिंह पर सीधे हत्या व हत्या की साजिश रचने के आरोप लगे हैं। सीबीआई पूरे मामले की जांच रही है। विधायक को भाजपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
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मीडिया से बात करते कुलदीप सिंह सेंगर
- फोटो : amar ujala
दो साल पहले सामने आया था मामला
दो साल पहले भाजपा विधायक व उनके भाईयों पर रेप का आरोप लगा था। इसके बाद पिता की पुलिस कस्टडी में मौत हुई। पीड़िता ने मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया तो मामला सुर्खियों में आया था। सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने विधायक को क्लीनचिट दे दी तो लेकिन परिवार, विपक्ष व समाजसेवियों के हंगामे के बाद केंद्र की मंजूरी पर सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की। वर्तमान में विधायक कुलदीप सीतापुर जेल बंद है।
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आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर तिहाड़ जेल किया गया शिफ्ट
- फोटो : एएनआई
उन्नाव जिले के माखी थानाक्षेत्र की रहने वाली युवती ने भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर जून 2017 में बंधक बनाकर कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। पीड़िता ने थाने में आरोपी विधायक के खिलाफ तहरीर दी थी लेकिन कार्रवाई करने की बात तो दूर पुलिस उसे टरकाती रही। इसके बाद पीड़िता ने कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। उन्नाव जिले के माखी थानाक्षेत्र की रहने वाली युवती ने भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर जून 2017 में बंधक बनाकर कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था।
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आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, सहआरोपी शशि सिंह
- फोटो : अमर उजाला
पीड़िता ने थाने में आरोपी विधायक के खिलाफ तहरीर दी थी लेकिन कार्रवाई करने की बात तो दूर पुलिस उसे टरकाती रही। इसके बाद पीड़िता ने कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। रविवार 28 जुलाई 2019 को हुए कार हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की जान चली गई। जबकि पीड़िता जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है। वहीं इस मामले में एक बड़ी बात सामने आई है कि जिस ट्रक की टक्कर से यह दर्दनाक हादसा हुआ उसके मालिक के बारे में पुलिस के हाथ अहम जानकारी लगी है।
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कुलदीप सिंह सेंगर, पीड़िता (फाइल फोटो)
साथ ही कई ऐसी बातों का भी खुलासा हुआ है जिनसे अभी तक लोग अपरिचित हैं। दरअसल, पुलिस को जांच में पता चला है कि रायबरेली-लालगंज हाईवे पर उन्नाव के चर्चित दुष्कर्म मामले की पीड़िता की कार को टक्कर मारने वाला ट्रक फतेहपुर के सपा नेता व पूर्व जिला सचिव नंदू पाल का है और कुलदीप सिंह सेंगर का भी फतेहपुर से नाता रहा है। यहां उनका पैतृक गांव है। वहीं सपा नेता का कहना है कि इसे साजिश बताकर बेवजह तूल दिया जा रहा है, जबकि यह महज हादसा है। सपा नेता का कहना है कि ट्रक के नंबर प्लेट में कालिख पोतने की वजह केवल फाइनेंसर की नजरों से बचना था।
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उन्नाव कांड
आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर की सुरक्षा व्यवस्था से लेकर उनके हर काम में उनका साथ देने वाले व्यक्ति की भतीजी के साथ गलत हरकत न होती तो शायद 2005 में शुरू हुई आपसी रंजिश दुश्मनी में न बदलती। यह बात पहली बार मामला सुर्खियों में आने पर मृतक कैदी के भाई ने कही थी। बंदी की मौत के बाद अब तीन भाईयों में उसका सबसे छोटा भाई महेश ही बचा है। तब महेश ने बताया था कि उसका दिल्ली में लोहे का कारोबार है। महेश ने बताया कि उनके सबसे बड़े भाई विधायक कुलदीप की सुरक्षा से लेकर उनके हर काम में उनका साथ देते थे।
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कुलदीप सिंह सेंगर भाई अतुल सेंगर एवं पीड़िता
इसके कारण वह (महेश) और सुरेंद्र भी कुलदीप व उनके परिवार की तरह थे। बताया कि आपसी मनमुटाव तब शुरू हुआ जब 1990 के पंचायत चुनाव में गुड्डू ने बीडीसी का चुनाव लड़ा। कुलदीप ने यह कहकर चुनाव लड़ने से रोका कि गांव में एक ही नेता रहेगा। विरोध के बाद भी बड़े भाई गुड्डू चुनाव जीते। इसके बाद भी वह (महेश) उनके साथ रहा। उनके मुताबिक पहली बार बसपा से विधायकी का टिकट उसने ही दिलाया था क्योंकि तत्कालीन बसपा नेता आरके चौधरी से उसकी काफी जान पहचान थी। बताया कि अगर देखा जाए तो कुलदीप को विधायक बनाने वाला वही है।
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दुष्कर्म पीड़िता का चाचा परिजनों से मिलकर फफक कर रो पड़ा
- फोटो : अमर उजाला
बताया कि 2010 में उसके बड़े भाई गुड्डू सिंह की शहर के मोहल्ला कलक्टरगंज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अगर वह (विधायक) गलत हरकत न करते तो आज भी वह उनका कभी विरोध न करता। हिस्ट्रीशीटर अपराधी होने के सवाल पर बताया कि माखी थाने में वही होता है जो नेता जी चाहते हैं। इसी की नतीजा है कि वह जिले में रहा भी नहीं और मारपीट, लूटपाट के मुकदमे उसके ऊपर दर्ज होते गए।
पत्नी को मुखग्नि देता उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता का चाचा
- फोटो : अमर उजाला
28 जुलाई 2019 को रायबरेली में पीड़िता की कार में टक्कर लगने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल दिया। इस हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो चुकी है। इस पहले 12 जुलाई 2019 को पीड़िता की मां ने सुप्रीम कोर्ट को एक पत्र भी लिखा था। जिसके आधार पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस मामले की सुनवाई की। जिसमें उन्होंने कई अहम फैसले दिए। पीड़िता के परिवार और वकील को को सीआईपीएफ की सुरक्षा दी गई। पीडि़ता की मां को 25 लाख रुपये का चेक दिया गया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता के एक्सीडेंट के मामले को 7 दिनाें में और पूर्व में चल रहे पूरे मामले को 45 दिनों में खत्म करने का समय दिया है। जिसके बाद सीबीआई इस मामले की तह तक पहुंचने के लिए लगातार छापे मार रही है।