उम्रकैद की सजा पाने वाले विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की हर सत्ता में सियासत की फसल लहलहाई। बसपा, सपा के साथ-साथ भाजपा के भी शासनकाल में कुलदीप ने खूब मलाई काटी। यही नहीं अपनी ननिहाल माखी में मिनी स्टेडियम व स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण तक करा लिया। हालांकि माखी ब्लाक बनवाने में सत्ता परिवर्तन आड़े आ गया। जिससे नया ब्लाक बनवाने का सपना धरा रह गया।
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विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
- फोटो : PTI
चार बार विधायक रहने वाले कुलदीप सिंह सेंगर ने कई दल बदलकर राजनीति की। आज से करीब 25 साल पहले ग्राम प्रधान के चुनाव से राजनीति पारी की शुरुआत करने वाले कुलदीप ने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2002 में पहली बार बसपा का दामन थामा और सदर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर विधायक बने।
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कुलदीप सिंह सेंगर
पहली बार विधायक बनने के बाद कुलदीप ने अपने ननिहाल माखी में मिनी स्टेडियम पास कराया। 4 सितंबर 2006 को कुलदीप ने ही मिनी स्टेडियम का शिलान्यास किया था। 2007 में सपा की टिकट पर बांगरमऊ विधायक चुने गए थे। वर्ष 2012 में वह भगवंतनगर विधानसभा से सपा से तीसरी बार विधायक बने थे। 2012 में सपा ने पूर्ण बहुमत से प्रदेश में सरकार बनाई तो लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए कुलदीप की ताकत कई गुना बढ़ गई।
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कुलदीप सिंह सेंगर
इसका उन्होंने अहसास भी कराया और ननिहाल माखी को नया ब्लाक घोषित करा लिया। चूंकि उस समय सत्ताधारी दल के विधायक थे इसलिए प्रशासन भी उनकी जी-हुजूरी में लगा रहता था। परिणामस्वरूप आनन-फानन माखी ब्लाक के निर्माण के संबंध में कार्रवाई भी शुरू हो गई। अधिकारियों ने ब्लाक भवन के साथ-साथ अफसरों के रहने के आवास समेत अन्य निर्माण कार्य का इस्टीमेट भी तैयार करके शासन को मंजूरी के लिए भेज दिया।
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बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
हालांकि इसे मंजूरी मिलती और ब्लाक निर्माण शुरु होता उससे पहले ही विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट शुरु हो गई। सत्ता विरोधी लहर का रुख भांप कुलदीप ने आनन-फानन 2017 में भाजपा में शामिल होकर बांगरमऊ से टिकट हासिल कर लिया। जनता ने भी सिर माथे चढ़ाकर कुलदीप को विधायक बना दिया। भाजपा ने भी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता हासिल की तो कुलदीप का कद फिर बढ़ गया।
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कुलदीप सिंह सेंगर
इसका फायदा उठाकर माखी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पास करा लिया। बड़ी बात यह है कि इसका तुरंत निर्माण भी शुरु करा लिया। इस साल यह बनकर तैयार भी हो गया। हालांकि इसके शुभारंभ से पहले ही दुष्कर्म का आरोप लग गया और कुलदीप जेल चले गए।
कुलदीप का राजनीतिक सफर
2002 में बसपा की टिकट से उन्नाव सदर सीट से विधानसभा पहुंचे।
2007 में पाला बदल सपा में चले गए और बांगरमऊ के विधायक बने।
2012 में विधानसभा क्षेत्र बदल कर भगवंतनगर सीट से चुनाव लड़ा और जीते।
2017 में पार्टी बदल भाजपा से चुनाव लड़ा और बांगरमऊ से दोबारा विधायक बने।
13 अप्रैल 2018 को किशोरी से दुष्कर्म के मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया।
20 दिसंबर 2019 को दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा।