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उन्नाव हादसा: मौत से पहले वैभव ने जान बचाने के लिए किया संघर्ष, अंगीठी बुझाने की कोशिश में झुलसीं अंगुलियां

Tue, 21 Jan 2025 06:16 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव

सार

Unnao News: मेवालाल ने रचना के ससुर सुंदर सिंह और सूबेदार आलोक को फोन करके बताया था कि कोई दरवाजा नहीं खोल रहा है और ना ही कोई जवाब दे रहा है। इसके बाद आलोक ने चचेरे भाई पंकज को फोन पर घर जाकर देखने को कहा था। दो मंजिला घर होने से जैसे-तैसे घर के अंदर पहुंचा, तो देखा नीचे के हिस्से में रसोई के बगल के कमरे में शव पड़े थे।
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उन्नाव हादसा - फोटो : amar ujala
कमरे में सूबेदार की पत्नी, बेटी और बेटे के मृत मिलने के मामले में देर शाम पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई। बताया गया कि कमरे में जल रही अंगीठी से जब सांस लेने में दिक्कत हुई तो सात साल के मासूम वैभव ने मां, छोटी बहन और खुद को बचाने के लिए संघर्ष किया था। इसमें उसके हाथ भी जल गए। सफल नहीं होने पर और दम घुटने से वह फर्श पर गिर गया। उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार खाना खाने के तीन घंटे बाद मौत हुई है।

सोमवार शाम करीब सात बजे पुलिस ने मां और उसके दोनों बच्चों के शव का पोस्टमार्टम कराया। इसमें वैभव के बाएं हाथ की अंगुलियां ऊपर की तरफ झुलसी मिली हैं। इससे अनुमान है कि उसने मौत से पहले अंगीठी को बुझाने का प्रयास किया होगा। वह इसमें सफल नहीं हो पाया। कमरे में उसके शव के पास ही खाली गिलास भी पड़ा मिला है। दूध भरा गिलास मेज पर रखा था और दवा की एक शीशी भी फर्श पर गिरी पड़ी थी।
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उन्नाव हादसा - फोटो : amar ujala
दस बजे तीनों की सोते समय ही हालत बिगड़ी
इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वैभव बचने के लिए इधर-उधर भागा, लेकिन सफल नहीं हो सका। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के अनुसार मां-बेटे की मौत खाना खाने के करीब तीन घंटे बाद हुई थी। अनुमान है कि रात करीब दस बजे तीनों की सोते समय हालत बिगड़ी और कार्बन मोनो ऑक्साइड के प्रभाव से कमरे में ऑक्सीजन की कमी हुई जो मौत की वजह बनी। रिपोर्ट के अनुसार तीनों के फेफड़े काम करना बंद कर दिया था।
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उन्नाव हादसा - फोटो : amar ujala
दस्तक देकर लौट गया था दूध देने आया गांव का युवक
आलोक के चचेरे भाई पंकज कस्बे के ही एक स्कूल में परिचालक हैं। उन्होंने बताया कि गांव से रोजाना आलोक के घर में दूध आता है। गांव का मेवालाल बांगरमऊ कस्बे में ही फर्नीचर की दुकान में काम करता है। वही रोज दूध लेकर आता है। सोमवार सुबह 9:30 बजे मेवालाल दूध देने के लिए पहुंचा था, लेकिन काफी देर तक दरवाजा पर दस्तक देने के बाद भी नहीं खुला। इस पर वह दूध पड़ोसी को देकर चला गया था।

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उन्नाव हादसा - फोटो : amar ujala
जैसे-तैसे घर के अंदर पहुंचा
मेवालाल ने रचना के ससुर सुंदर सिंह और सूबेदार आलोक को फोन करके बताया था कि कोई दरवाजा नहीं खोल रहा है और ना ही कोई जवाब दे रहा है। इसके बाद आलोक ने चचेरे भाई पंकज को फोन पर घर जाकर देखने को कहा था। दो मंजिला घर होने से जैसे-तैसे घर के अंदर पहुंचा, तो देखा नीचे के हिस्से में रसोई के बगल के कमरे में शव पड़े थे। आलोक के मुताबिक घर से कोतवाली 800 मीटर और सीओ कार्यालय 500 मीटर दूर हैं, जबकि बच्चे के स्कूल की दूरी डेढ़ किलोमीटर है।
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उन्नाव हादसा - फोटो : amar ujala
एफएसओ बोले- बंद कमरे में न रखें अंगीठी
एफएसओ शिवराम यादव ने बताया कि कमरे में अंगीठी जलाकर रखना स्लो प्वाइजन और खतरे को खुद बुलाने जैसा है। बताया कि अगर बहुत जरूरी हो, तो कोयला पूरी तरह जलने के बाद ही अंगीठी को कमरे में रखें। एक खिड़की या दरवाजा पूरी तरह खुला रखें और बेड के पास ही एक बाल्टी में पानी भरकर जरूर रखें। इससे कमरे में ऑक्सीजन घातक स्तर तक कम नही होगी। बताया कि हीटर और ब्लोअर जलाने में भी इसी तरह की सावधानी बरतना जरूरी है।
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इकलौती बेटी होने से मायके में भी दुलारी थी रचना
रचना भड़सर नौसहरा स्थित अपने मायके में भी दो भाइयों के बीच में इकलौती बहन थी। सभी उसे बहुत प्यार करते थे। बेटी की मौत से पिता शिवशंकर, मां मुन्नी देवी भाई आशू और शुभम सिंह ने जैसे ही बहन और दोनों बच्चों के शव देखे बेहाल हो गए।
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बच्चे ही परिवार का सहारा थे
बाबा सुंदर बार-बार यही कह रहे थे कि बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां भेजा था, घर बनवाया था, नहीं पता था कि वह हमेशा के लिए दूर हो जाएंगे। उधर, भाभी और भतीजी, भतीजे की मौत की पर पहुंची दोनों बहनें भी बेहाल रहीं। ससुर ने बताया कि पौत्र वैभव कस्बे के एक स्कूल में कक्षा दो का छात्र था। वैष्णवी अभी पढ़ने नहीं जाती थी। मन होने पर वह भाई के साथ जाया करती थी, ताकि उसका स्कूल जाने का मन करने करे और प्रवेश कराया जा सके। अब कौन पढ़ने जाएगा। फोन पर बाबा, दादी कहकर कौन बुलाएगा। इकलौता बेटा होने से यही बच्चे ही परिवार का सहारा थे।
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16 साल पहले हुई थी आलोक और रचना की शादी
नौकरी लगने के आलोक की 13 जुलाई 2009 में फतेहपुर चौरासी थानाक्षेत्र के भड़सर नौसहरा में रचना से शादी हुई थी। जिस समय शादी हुई थी आलोक की तैनाती केरल में थी। वह रचना को लेकर भी गया था। बेटे और बेटी का जन्म भी वहीं हुआ था। वर्ष 2023 में लद्दाख में पोस्टिंग होने के बाद आलोक ने पत्नी और बच्चों को पहले गांव भेजा, फिर बेटे की पढ़ाई के लिए बांगरमऊ के मोहल्ला न्यू कटरा में किराए के घर पर रखा। साल 2024 में अपना दो मंजिला घर बनवाकर वसंत पंचमी पर गृहप्रवेश कराया था। पत्नी और बच्चे वहीं रहते थे।
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