उन्नाव हादसा
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बच्चे ही परिवार का सहारा थे
बाबा सुंदर बार-बार यही कह रहे थे कि बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां भेजा था, घर बनवाया था, नहीं पता था कि वह हमेशा के लिए दूर हो जाएंगे। उधर, भाभी और भतीजी, भतीजे की मौत की पर पहुंची दोनों बहनें भी बेहाल रहीं। ससुर ने बताया कि पौत्र वैभव कस्बे के एक स्कूल में कक्षा दो का छात्र था। वैष्णवी अभी पढ़ने नहीं जाती थी। मन होने पर वह भाई के साथ जाया करती थी, ताकि उसका स्कूल जाने का मन करने करे और प्रवेश कराया जा सके। अब कौन पढ़ने जाएगा। फोन पर बाबा, दादी कहकर कौन बुलाएगा। इकलौता बेटा होने से यही बच्चे ही परिवार का सहारा थे।