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'कलम के जादूगर' गोपाल दास नीरज के बारे में शायद ही आपको पता हों ये बातें, राजनीति पर कुछ ऐसा बोले थे

Sat, 21 Jul 2018 11:56 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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गोपाल दास नीरज
सदाबहार नगमों के रचयिता, 'कलम के जादूगर' गोपाल दास नीरज ने दिल्ली के एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। यह खबर मिलते ही हिंदी साहित्यजगत में दुखों का पहाड़ सा टूट पड़ा। हर शख्स के दिलो-दिमाग में गोपाल दास नीरज की एक ऐसी अनूठी छवि बनी है जिसे भविष्य की कोई भी आंधी मिटा नहीं सकती। गोपाल दास नीरज का जन्म 4 जनवरी 1925 को यूपी के इटावा जिले के ग्राम पुरावली में हुआ था। मात्र 6 वर्ष की आयु में पिता गुजर गये। 1942 में एटा से हाई स्कूल परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। शुरुआत में इटावा की कचहरी में कुछ समय टाइपिस्ट का काम किया उसके बाद सिनेमाघर की एक दुकान पर नौकरी की। लंबी बेकारी के बाद दिल्ली जाकर सफाई विभाग में टाइपिस्ट की नौकरी की। वहाँ से नौकरी छूट जाने पर कानपुर के डी0ए0वी कॉलेज में क्लर्की की। फिर बाल्कट ब्रदर्स नाम की एक प्राइवेट कम्पनी में पाँच वर्ष तक टाइपिस्ट का काम किया। नौकरी करने के साथ प्राइवेट परीक्षाएँ देकर 1949 में इण्टरमीडिएट, 1951 में बी0ए0 और 1953 में प्रथम श्रेणी में हिंदी से एम0ए0 किया।


 
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गोपाल दास नीरज
भारतीय सिनेमा के सदाबहार अभिनेता देव आनंद के फेमस गानों का सॉन्ग राइटर जब पॉलिटिक्स में उतरा तो पूरा बॉलीवुड हिल गया। अपने फिल्मी करियर की बुलंदियों पर पहुंचने से पहले ही उस जानेमाने गीतकार ने राजनीति की तरफ अपना पहला कदम कानपुर शहर में रखा। हम बात कर रहे हैं मशहूर गीतकार, कवि, फिल्म फेयर पुरस्कार विजेता, पद्म भूषण और पद्मश्री गोपाल दास ‘नीरज’ की। बहुत ही कम लोगों को यह मालूम है कि 60 और 70 दशक में अपने बॉलीवुड गीतों के जरिये लोगों के दिलों में जगह बना चुके गोपाल दास ‘नीरज’ ने चुनाव भी लड़ा था।


 
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गोपाल दास नीरज
भीड़ में नीरज की इस बात को सुनकर सभी हो गए हैरान.....

साल 1967 के आम चुनाव में ‘नीरज’ कानपुर लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे थे। अपनी चुनावी सभा में उन्होंने लोगों से अपील की थी कि जो भी भ्रष्ट हों या चोर हों वे उन्हें वोट न दें। बस यही एक बात जनमानस को घर कर गई। और वह 60 हजार वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। उस चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़े एसएम बनर्जी जीते थे। कांग्रेस का प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहा था।

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गोपाल दास नीरज
ये हैं नीरज के द्वारा लिखे गए  हिट बॉलीवुड गाने...
कहता है जोकर सारा जमाना (फिल्म-मेरा नाम जोकर )
दिल आज शायर है गम आज नगमा है (फिल्म- गैम्बलर)
खिलते हैं गुल यहां मिल के बिछड़ने को (फिल्म- शर्मीली )
शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब (फिल्म- प्रेम पुजारी )
कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे (फिल्म- नई उम्र की नई फसल )..........

 
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गोपाल दास नीरज
एक बार नीरज जी  ने कहा कि मतदान से ऐन पहले वह चुनाव से हट गए थे। बोले कि कांग्रेस ने सपोर्ट करने की बात कही थी। लेकिन न तो सपोर्ट लिया और न दिया। चुनावी मंच पर श्रोता उन्हें सुनने के लिए लालायित रहते थे। उस चुनाव परिणाम में मिले मतों ने तब सभी नेताओं और पार्टियों को चौंका दिया था। नीरज जी ने कहा था कि ‘जो चोर हैं वह मुझे वोट न दें’ सार्वजनिक अपील का लोगों पर गहरा असर पड़ा था। जनता ने ईमानदारी दिखाते हुए ‘नीरज’ को जमकर वोट दिए थे। उन्होंने कहा था कि सभी साहित्यकारों और रचनाकारों को अपने बीच से एक प्रत्याशी खड़ा करना चाहिए और उसे मिलकर चुनाव लड़ाना चाहिए। इससे जनता को भी किसी साफ-स्वच्छ छवि वाले व्यक्ति का विकल्प मिलेगा।
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