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जानें, बढ़ती उम्र में उमा कैसे कायम रख पा रहीं अपनी ‘फायरब्रांड पर्सनैलिटी’ 

Wed, 03 May 2017 04:38 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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उमा भारती
आज ही की तारीख यानी 3 मई 1959 को एक लोधी राजपूत परिवार में जन्मी उमा भारती की फायरब्रांड पर्सनैलिटी का राज कम ही लोग जानते होंगे। आज 58 साल की उम्र में भी उमा के जुबान से निकला हर बयान देश की राजनीति में हवा बदलने का काम कर देता है। वह युवावस्था में ही भारतीय जनता पार्टी से से जुड़ गयीं थीं। उन्होंने 1984 में सबसे पहला लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन हार गयीं। इसके बाद 1989 के लोकसभा चुनाव में वह खजुराहो संसदीय क्षेत्र से सांसद चुनी गयीं और 1991, 1996, 1998 में यह सीट बरकरार रखी। 1999 में वह भोपाल सीट से सांसद चुनी गयीं। वाजपेयी सरकार में  उन्होंने मानव संसाधन विकास, पर्यटन, युवा मामले एवं खेल और अंत में कोयला और खदान जैसे विभिन्न राज्य स्तरीय और कैबिनेट स्तर के विभागों में कार्य किया।  
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उमा भारती
उमा भारती का जन्म एमपी के टीकमगढ़ जिले के डुंडा नामक स्थान पर हुआ। उनकी शिक्षा छठी कक्षा तक हुई। वह बचपन से ही निडर और बेबाक थीं। उनमे साहस और नेतृत्व करने की बचपन से ही देखी जाती थी। वह लोधी राजपूत समुदाय के अंतर्गत आती हैं।     
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उमा भारती
नवम्बर 2004 को लालकृष्ण आडवाणी की आलोचना के बाद उन्हें भाजपा से बर्खास्त कर दिया गया। 2005 में उनकी बर्खास्तगी हट गयी और उन्हें पार्टी की संसदीय बोर्ड में जगह मिली। इसी साल वह पार्टी से हट गयी क्योंकि उनके प्रतिद्वंदी शिवराज सिंह चौहान को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया गया। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनशक्ति पार्टी नाम से एक अलग पार्टी बना ली।  

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उमा भारती
7 जून 2011 को उनकी पुनः भाजपा में वापसी हुई। उत्तर प्रदेश में पार्टी की स्थिति सुधारने के लिए उन्होंने "गंगा बचाओ" अभियान चलाया। मार्च 2014 में हुए उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में वह महोबा जिले की चरखारी सीट से विधानसभा सदस्य चुनी गयीं। वह वर्ष 2014 में झांसी लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से से 16वीं लोकसभा की सांसद चुनी गई हैं और उन्हें मोदी मंत्रिमंडल में भारत की जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्री बनाया गया।   
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उमा भारती
उमा भारती अभी भी पुराने तेवर में ही दिखती हैं। बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उमा भारती ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनकर रहेगा। इसे बनाने से कोई माई का लाल नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि उन्हें पद का लोभ नहीं है। वह राम, गंगा और तिंरगा के लिए इंद्र का सिंहासन भी छोड़ सकती हैं। उमा का लाल-पालन ग्वालियर घराने की राजमाता विजयराजे सिंधिया ने की थी। वे ही उन्हें पार्टी में लेकर आई थीं।
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