बांदा के आवासीय विद्यालय में हुई बेटों की मौत से परिवार बेहाल है। दोनों परिवार बच्चों की पढ़ाई और रहने के लिए सालाना 80 हजार रुपये फीस दे रहे थे। परिवार ने सोचा था कि बच्चे पढ़कर उजाला करेंगे, लेकिन बच्चों को अंधेरी रात निगल गई।
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residential school in banda
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
साधारण किसान परिवार के नितिन और अरुण। जिनके परिवार ने अपनी खुशियों को दांव पर लगाकर बेटों के उज्ज्वल भविष्य का सपना देखा था। दो-दो बेटों को बांदा के आवासीय विद्यालय में भेजकर 80 हजार रुपये सालाना फीस दे रहे थे। उन्हें क्या पता था कि उनके बेटों को रविवार रात का अंधेरा निगल जाएगा। घरवालों को केवल इस बात की तकलीफ सबसे अधिक है कि विद्यालय की ओर से बच्चों के बीमार होने की खबर रात में क्यों नहीं दी गई।
थाना गिरवां के गांव सरस्वाह निवासी सुनील प्रजापति किसान हैं। घर में पत्नी अनीता देवी व तीन बेटे अनीस, नितिन और हर्ष व एक बेटी लक्ष्मी हैं। सुनील के पास सात-आठ बीघा खेत हैं। इसी के बूते वह बेटों के भविष्य को संवारने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने अपने बेटे नितिन और हर्ष का प्रवेश आवासीय विद्यालय में कराया था। एक बेटे की फीस 40 हजार सालाना थी। इस तरह सुनील 80 हजार रुपये सालाना देने के लिए अपनी हर खुशी को दांव पर लगाकर बैठे थे।
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छात्रों की मौत पर विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसी तरह से थाना चिल्ला के गांव महेंदु निवासी पुष्कर उर्फ जयकिशोर कुशवाहा ने भी दो बेटों अरुण और उत्कर्ष को आवासीय विद्यालय में प्रवेश दिलाया था। पुष्कर भी सामान्य किसान हैं और पिता विजयपाल कुशवाहा पूर्व सैनिक है। पुष्कर ने बताया कि दोनों बेटों की शिक्षा का खर्च उनके दादा विजयपाल उठा रहे थे। पुष्कर ने बताया कि घर में पत्नी प्रीती व बेटी दीपिका है।
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छात्रों की मौत पर विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बेटों की मौत की खबर सोमवार की सुबह जब उन्हें मिली तो उनके सामने अंधेरा छा गया। समझ नहीं आया कि आखिर कुछ घंटे में ऐसा क्या हुआ कि उनके बच्चे अब उन्हें दोबारा देखने को नहीं मिलेंगे। बेसुध हुआ परिवार सब कामकाज छोड़कर मेडिकल कॉलेज पहुंचा।
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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिजनों ने कहा कि स्कूल प्रबंधक ने उन्हें अगर रात में ही खबर दी होती तो शायद वह बेहतर इलाज का प्रयास करके अपने कलेजे के टुकड़ों को बचाने का भरसक प्रयास करते लेकिन विद्यालय की ओर से की गई लापरवाही ने उनके घरों के चिराग को बुझा दिया। जिनका दुख अंतिम सांस तक उन्हें रहेगा।
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विद्यालय में बने कमरे में खाली पड़े तख्त
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं, विसरा सुरक्षित
बांदा के मेडिकल कॉलेज बांदा में सोमवार को नितिन और अरुण का पोस्टमार्टम हुआ। देर शाम उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को मिली। बताया गया कि दोनों छात्रों की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। मौत का कारण जानने के लिए उनके विसरा को सुरक्षित कर प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जिससे विस्तृत जांच कर मौत का कारण पता किया जा सके। प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर बलराम सिंह ने बताया कि प्रकरण में अभी तक परिवार की तरफ से शिकायत नहीं की गई। अगर शिकायत मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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अस्पताल में भर्ती छात्र
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चंदे से मंगवाए थे मोमोज और फिंगर चिप्स
रविवार के चलते सभी बच्चों ने बाहर का खाने की इच्छा जताई। सभी ने 20 रुपये का चंदा दिया। इसके बाद विद्यालय में ही पढ़ने वाला कक्षा सात का छात्र राहुल साइकिल से महाराणा प्रताप चौक आया था। यहां एक ठेल से उसने मोमोज और फिंगर चिप्स लिए। इसके बाद विद्यालय आया और सभी ने बैठकर एक साथ इनका आनंद लिया। मृतक नितिन के भाई हर्ष का आरोप है कि कुछ बच्चों ने चटनी खाई थी, उन्हीं की हालत बिगड़ी है।
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नितिन की फाइल फोटो
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कम पड़ गई दाल तो जबरदस्ती खाने को दी मोमोज की चटनी
रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में स्थित पोस्टमार्टम हाउस में मृतक नितिन की मां अनीता देवी व छोटे भाई हर्ष ने विद्यालय प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका आरोप लगाया है कि स्कूल में दाल कम पड़ गई थी इसलिए बच्चों को खाने में मोमोज व फिंगर की चटनी दी गई थी। चटनी में पानी डालकर रोटी खाने के लिए कहा गया था। आरोप है कि इसे नहीं खाने पर विद्यालय प्रबंधक ने उन्हें धमकाया था। इसी से उसकी हालत बिगड़ी थी।
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अरुण की फाइल फोटो
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रात में घर सूचना देने को कहते रहे बच्चे, नहीं कराई बात
नितिन के साथ उसका छोटा भाई हर्ष कक्षा एक में इसी विद्यालय का छात्र है। वहीं अरुण का बड़ा भाई उत्कर्ष कक्षा पांच में पढ़ता है। दोनों के भाइयों ने परिजन को बताया कि उन्होंने रात में ही घर पर उनकी तबीयत खराब होने की सूचना देने को कहा था लेकिन स्कूल के बड़े सर ने बात नहीं कराई। सोमवार सुबह जिला अस्पताल से परिजन को बच्चों के बीमार होने की सूचना दी गई। परिजन अस्पताल पहुंचे तो दोनों बच्चों की मौत हो चुकी थी। परिजन ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
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एफएसडीए की टीम ने भरे छह नमूने
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ठेल वाले की तलाश शुरू
शहर के कनवारा रोड स्थित बीएल विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय के छात्र राहुल ने बताया कि उसने महाराणा प्रताप चौक पर एक ठेल वाले से मोमोज और फिंगर खरीदे थे। अब फूड विभाग उस ठेल वाले की तलाश कर रहा है, जिसकी ठेल से फिंगर और मोमोज खरीदे गए थे।
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विद्यालय में बने कमरे में खाली पड़े तख्त और नमी से भीगी दीवार
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एफएसडीए की टीम ने भरे छह नमूने
विद्यालय में दो बच्चों की मौत के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम भी पहुंची। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी नंदलाल गुप्ता ने रसोई की जांच की। यहां लाइसेंस नहीं लिया गया था। इसके साथ ही अन्य नियमों की भी अनदेखी दिखी। टीम ने यहां से छह नमूने लेकर जांच के लिए भेजे। इसमें मूंग की दाल, आटा और रिफाइंड के अलावा पका चावल, रोटी और कद्दू की सब्जी का नमूना लिया गया। दरअसल रात को छात्राओं ने मूंग की दाल और रोटी ही खाई थी। ऐसे में इसकी जांच भी जरूरी हो गई।
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दोनों छात्रों के बीमार होने की जानकारी देता विपिन
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नहीं दी गई कोई तहरीर
दोनों बच्चों की मौत के बाद सोमवार रात तक कोतवाली में कोई तहरीर नहीं दी गई। कोतवाल बलराम सिंह ने बताया कि दोनों बच्चों के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। किसी की तरफ से कोई तहरीर नहीं दी गई है।
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विद्यालय पहुंचे अरुण के परिजन, नाराजगी जताते हुए
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अटल आवासीय विद्यालय में एक माह पहले बिगड़ी थी 30 बच्चों की तबीयत
बांदा में आवासीय विद्यालयों में लापरवाही लगातार सामने आ रही है, इसके बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा सके हैं। एक माह पहले 19 जुलाई को अछरौड स्थित अटल आवासीय विद्यालय में खाना खाने के बाद 30 बच्चों की हालत बिगड़ गई थी। इसमें कई छात्राओं को जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इसके बाद टीमें दौड़ीं जांच हुईं, लेकिन बाद में सब ठंडा पड़ गया। इसके दो दिन बाद ही 21 जुलाई को हरदौली स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम को दाल में कीड़े रेंगते और मूंगफली दाना फफूंदा लगा मिला था। दोनों ही जगह से नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए थे, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट नहीं आई है।
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दो बच्चों की मौत की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। बेसिक शिक्षा विभाग से विद्यालय को कक्षा 8 तक की मान्यता प्रदान की गई है। आवासीय संचालन के संबंध में भी जांच कराई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और खाद्य पदार्थों की जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।-अमित आसेरी, डीएम बांदा