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जब दुनिया ने नकारा तो 'प्यार की कसम' पूरी करने ट्रेन के सामने कूदे चाची-भतीजा

Mon, 13 Nov 2017 10:42 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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रेलवे लाइन का वह स्थान जहां दोनों ने ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या की, मनीष (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
रिश्ते में चाची और भतीजे के बीच प्रेम संबंधों को समाज ने स्वीकार नहीं किया तो दोनों ने इस दुनिया में नाता तोड़ने की कसम खा ली। मामला इटावा के भरथना इलाके में रहने वाले चाची-भतीजे का है।
शनिवार सुबह मनीष अपनी बाइक पर बैठाकर चंचल को लेकर करीब 6 बजे  मेढ़ीदुधी पहुंचा। दोनों ने पास-पास बैठकर करीब तीन-चार घंटे तक बातचीत की। इसके बाद मनीष पास के गांव बंधा में गया वहां से पानी की बोतल खरीदी।
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भरथना के मेढ़ीदुधी में प्रेमी-प्रेमिका के मिले आधार कार्ड फोटो पहचान पत्र एवं अन्य सामान - फोटो : अमर उजाला
बातचीत के दौरान ही  डाउन लाइन पर तेजी से मालगाड़ी भरथना की ओर आती दिखी। 10:10 बजे दोनों ने एक दूसरे को अपनी बांहों में भर लिया और मालगाड़ी के आते ही बीच ट्रैक पर कूद पडे़। उनके शव के पास से मिले  मोबाइल एवं आधार कार्ड से दोनों की पहचान हुई ।ग्रामीणों की मानें तो दोनों को ट्रैक से हटने के लिए लोग चिल्लाए भी उनके ऊपर पत्थर भी फेंके लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। गांव से आए लोगों ने बताया कि दोनों के घर गांव में पास पास है। काफी समय से दोनों का प्रेम प्रंसग चल रहा था। 

 
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मौके पर लगी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
माहभर पहले भी गायब हुए थे दोनों 
ट्रेन के आगे कूदकर जान देने वाले प्रेमी-प्रेमिका अक्टूबर माह में भी एक बार घर से कहीं चले गए थे। इस मामले में पंचायत भी हुई थी।
पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि चंचल अपने मायके ग्राम पिलक थाना मंगलपुर भेज दी गई । वहां से अक्तूबर में वह मनीष के साथ कहीं चली गई थी, जिसकी एनसीआर मंगलपुर
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भरथना के मेढ़ीदुधी में प्रेमी-प्रेमिका के मिले आधार कार्ड फोटो पहचान पत्र एवं अन्य सामान - फोटो : अमर उजाला
कानपुर देहात थाने में 10 अक्तूबर को दर्ज कराई गई थी। इसके बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया। इसके बाद भी चंचल मायके में ही बनी रही। चंचल का डेढ़ माह का पुत्र किट्टू भी है। गांव वालों ने बताया कि मनीष शुक्रवार शाम शाम छह बजे तक अपने गांव में देखा गया था। इसके बाद उसकी मौत की खबर मिली। दोनों शनिवार सुबह करीब छह बजे बाइक से मेढ़ीदुधी के पास पहुंचे। वहां अपनी योजना बनाई। चंचल अपने डेढ़ साल के पुत्र किट्टू को अपने मायके ही छोड़ आई थी। सूचना के बाद भी चंचल के मायके से कोई नहीं पहुंचा। मनीष के भाई चाचा और अन्य परिजन घटना स्थल पहुंचे।
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