बिकरू कांड में फंसे सीओ के खिलाफ जांच तेज हो गई है। दोनों सीओ ने जांच अधिकारी को बयान दर्ज कराए हैं। सीओ ने खुद को निर्दोष बताते हुए विकास दुबे व उसके साथियों के साथ किसी भी तरह की सांठगांठ से इनकार किया है। हालांकि पुख्ता साक्ष्यों पर उनसे कुछ बोलते नहीं बना। बिकरू कांड में और भी सीओ को नोटिस जारी हैं लेकिन वो अभी बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचे हैं।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
बिकरू कांड में पचास से अधिक पुलिसकर्मी फंसे हैं। इसमें 10 सीओ हैं। ये सीओ बिल्हौर, नजीराबाद और रसूलाबाद सर्किल में तैनात रहे हैं। एसआईटी ने इन सभी की भूमिका जांचने की सिफारिश की थी। आरोप है कि इन सीओ की तैनाती के दौरान विकास दुबे, जय बाजपेई समेत उनके अन्य साथियों ने आपराधिक इतिहास होने के बावजूद शस्त्र लाइसेंस बनवाए हैं।
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डीआईजी ने मामले की जांच एसपी पश्चिम डॉ. अनिल कुमार को सौंपी थी। एसपी ने सभी सीओ को बयान के लिए नोटिस जारी किया था। एसपी ने बताया कि अभी दो सीओ के बयान हुए हैं। बाकी को रिमाइंडर भेजा जाएगा।
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दस्तावेजों में मिले पुख्ता साक्ष्य
जांच में फंसे सीओ के खिलाफ एसआईटी ने पुख्ता साक्ष्य जुटाए हैं। ये साक्ष्य जांच अधिकारी को सौंप दिए गए हैं। इसमें सीओ की सीधी भूमिका सामने आ रही है। सीओ के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। जांच में समय लगेगा लेकिन शुरुआती तफ्तीश में जो सुबूत हैं, उससे सीओ पर विभागीय कार्रवाई होना तय है।
11 नहीं 10 सीओ की जांच
जिन सीओ पर कार्रवाई होनी है, उनकी सूची जांच अधिकारी को भेजी गई थी। नौ के नाम लिखे थे, जबकि दो नामों की जगह पर उनके कार्यकाल का जिक्र था। जब जांच की गई तो पता चला कि ये दोनों एक ही शख्स हैं। मतलब जांच 10 सीओ के खिलाफ चल रही है।