दिवंगत गोपाल दास नीरज
क्या आपने उपन्यासकार कुंदन से प्यार किया पर शायद आपकी उनसे जोड़ी नहीं बन पाई?
(यह नाम सुनते ही तब 88 साल के नीरज चहक कर बोले थे) हां, सही है। तुम्हें कैसे मालूम? पागल हो गया था मैं..12 साल तक टूटकर प्यार किया उसे, फिर न जाने कहां चली गई? हर रोज उसकी राह तकता-तकता पगला गया था।
..मेर घर कोई खुशी आती तो कैसे आती, उम्र भर साथ रहा दर्द महाजन की तरह...
आपको तो यशोदा से प्यार था?
हां, वो लड़कपन था। वह बहुत पैसे वाली थी और मैं मुफलिस...मैं पीड़ा का राज कुंवर हूं, तुम शहजादी स्वरूप नगर की, हो भी गया प्यार हमसे तो मिलन कहां होगा? क्या कर सकता था। उसे कभी भूल नहीं पाया। उरई में मिल गई थी सालों बाद, कटे-फटे कपड़ों में लिपटी, परेशान, इतना दुख हुआ कि कई दिन सो न सका।
कैसा भी हो मौसम, कैसी चले बयार
बड़ा कठिन है भूलना पहला-पहला प्यार
हंसी जिसने खोजी, चमन लेके लौटा
खुशी जिसने खोजी धन लेके लौटा
प्यार खोजने चला जो, वो न तन लेके लौटा न मन लेकेलौटा
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