गोपाल दास नीरज के देहांत की खबर मिलते ही उनके श्रोताओं और चाहने वालों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। गोपाल दास नीरज ने दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। नीरज जी से जुड़े एक यादगार पल के बारे में कानपुर की कृतिका मिश्रा ने भावुक होते हुए कहा--- बात 1999 की है तब मैं 3 साल की थी। मेरे नाना अर्मापुर कैंपस में रहते थे , वहां पर कवि सम्मेलन हो रहा था । उस मंच पर श्री गोपाल दास नीरज, हरिओम पवार सहित बड़े-बड़े कवि मौजूद थे। मुझे भी महान कवियों के बीच एक कविता पाठ करने का मौका मिला।
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1999 में कविता पाठ करने के बाद बच्ची का किया उत्साहवर्धन
उस मंच पर मैंने एक कविता सुनाई थी-' कलयुग में अब ना आना रे मेरे कृष्ण कन्हैया'। इस कविता को सुनकर नीरज ने मुझे माला पहनाया था और हरिओम पवार जी ने अपनी जेब से निकाल कर सौ रुपए का नगद पुरस्कार दिया था।
कृतिका मिश्रा ने बताया कि कविवर नीरज ने मुझे गोद में बिठा लिया था। कैमरे में कैद हुए वो यादगार पल आज भी सुरक्षित हैं। आज यह जानकारी प्राप्त हुई कि कविवर नीरज जी का एम्स में निधन हो गया है तो मुझे अत्यधिक कष्ट हुआ ।
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श्रीप्रकाश जयसवाल ने दी श्रद्धांजलि
गोपाल दास नीरज देश के चोटी के कवियों में से थे। करीब 3 साल पहले वह मेरे यहां आयोजित कवि सम्मेलन में पधारे थे। उनसे मिलने का अवसर मिला था। काफी उदार व्यक्तित्व था उनका। मेरी श्रद्धांजलि.... श्रीप्रकाश जायसवाल पूर्व केंद्रीय मंत्री
नीरज जी ने मुझे कनपुरिया बोली कि स्टाइल से पहचाना था। कुछ वर्ष पुरानी बात है, लखनऊ के रवींद्रालय में आयोजन था मुझे भी जाने का अवसर मिला था। वहाँ पर नीरज जी को देखकर उन्हें प्रणाम करने गया। मैने परिचय दिया कि मैं राजू श्रीवास्तव हूं, इस पर वो तपाक से बोल पड़े, अच्छा वो कानपुर वाले। फिर कहने लगे तुम्हारी कनपुरिया स्टाइल वाला चुटकुला अच्छा लगता है। आज उनके निधन पर बड़ा दुख हुआ।,....राजू श्रीवास्तव