अक्सर देखा जाता है कि विद्यार्थी परीक्षा के तनाव में खाना-पीना भूल कर निराश-उदास रहने लगते हैं। परीक्षा हर साल आती है, इस बार नहीं तो अगली बार सफलता मिलेगी। असफल होने पर कोई गलत कदम उठाना मूर्खता है।
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यह टिप्स विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता ने यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ साइंसेस एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले परीक्षा के तनाव से कैसे बचें? विषय पर कार्यशाला में बताए गए।
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इंडियन साइकि याट्रिक सोसाइटी के सेंट्रल जोन के अध्यक्ष वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. रवि कुमार ने कहा कि इस समय डिप्रेशन महामारी का रूप ले रहा है। परीक्षा का अधिक तनाव डिप्रेशन में धकेल सकता है। डिप्रेशन को पहचानें। परीक्षा को सामान्य रूप से लेंगे तो प्रश्नों का उत्तर अच्छी तरह दे सकेंगे। तनाव बढ़ाने से याद की हुई बात भी जेहन से निकल जाती है। किसी एक परीक्षा से जीवन का निर्धारण नहीं होता। सामान्य भोजन और नींद लें। घबराएं नहीं, निष्ठा और लगन से सफलता अवश्य मिलेगी।
विद्यार्थियों के तनाव के कारण
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-अभिभावकों की अत्याधिक अपेक्षाएं
-दूसरों से प्रतिस्पर्धा
-नियमित अध्ययन न करना, मोबाइल फोन पर अधिक समय बरबाद करना
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डिप्रेशन के लक्षण
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- भूख कम लगना
- व्यवहार में बदलाव, चिड़चिड़ापन बढ़ना
- दूसरों से मिलने से बचना, कमरे में अकेले पड़ा रहना
- स्मरण क्षमता का कम हो जाना
- भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाना
- नींद में कमी आ जाना
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तनाव से बचने का तरीका
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- प्रवेश के समय से नियमित अध्ययन
- समय प्रबंधन, पाठ्यक्रम को लेकर प्लानिंग
- सामान्य भोजन, चाय-पान का कम सेवन
- समय पर सोना और पूरी नींद लेना
- माता-पिता, अभिभावकों से संवाद बनाए रखें
- अच्छे विद्यार्थियों के साथ रहने का प्रयास करें
- अनर्गल वार्ता में समय बरबाद न करें, योग, प्राणायाम करें
- असफलता से सीखें और अपने में सुधार लाएं
- ध्यान रखें, परीक्षा की असफलता जीवन की असफलता नहीं है
- चिंता, अवसाद होने पर माता-पिता को बताएं
- समझ कर पढ़ें, रटें नहीं, नकल का प्रयास न करें
- माता-पिता बच्चों के साथ बातें शेयर करें
- बच्चों के तनाव में होने पर हौसला बढ़ाएं, अपेक्षाएं न थोपें
- माता-पिता तीन सी का ध्यान रखें। कम्युनिकेशन- बातचीत बनाए रखें, कम्पैरिजन-बच्चों की तुलना किसी अन्य के साथ न करें, क्रिटिसिज्म-बच्चों के सामने उनकी या किसी अन्य की निंदा न करें।