दिवाली के पटाखों से जहां दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और इसके आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है, वहीं कानपुर में इस बार काफी सुधार आया है। पिछले वर्षों की तुलना में पटाखों के कारोबार में पांच गुना गिरावट आई तो आतिशबाजी भी कम हुई।
इससे स्थिति भयावह होने से बच गई। शनिवार को शहर की औसत एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 270 रहा, जबकि ग्रेटर नोएडा का 414, गाजियाबाद का 466 और दिल्ली का 390 रिकॉर्ड किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से कानपुर के चार स्थानों पर लगाए गए प्रदूषण मापक यंत्रों में सबसे ज्यादा प्रदूषित क्षेत्र ब्रह्मनगर चौराहे के पास नेहरूनगर रहा।
यहां के 500 मीटर के दायरे में एक्यूआई 304 रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार दो दिनों में आसमान में बादल होने की संभावना है। ऐसे में प्रदूषण की मात्रा में इजाफा हो सकता है। उसके बाद हवाओं की रफ्तार में तेजी से प्रदूषित कण एक जगह इकट्ठा नहीं हो पाएंगे। इससे प्रदूषण की मात्रा काफी कम हो सकती है।
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कानपुर का मौसम
- फोटो : अमर उजाला
धुएं के बादल छंटते ही तीन डिग्री गिरा रात का पारा
पटाखों का धुआं छंटते ही रात का पारा एक झटके में तीन डिग्री सेल्सियस लुढ़क गया। इसी तरह दिन की धूप का असर भी कम रहा। अधिकतम तापमान एक डिग्री नीचे आकर 29.4 डिग्री और न्यूनतम 12.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
एक दिन पहले न्यूनतम पारा 15 डिग्री था। जल्द ही पहाड़ों से आने वाली शीत लहर भी चलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार जैसे-जैसे आसमान पूरी तरह से साफ होगा, ओस के साथ कोहरा भी पड़ेगा। तापमान और नीचे जाने की पूरी संभावना है। इसी तरह धीरे-धीरे दिन का पारा भी लुढ़केगा।
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कानपुर का मौसम
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स्थानीय चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ का असर सिर्फ दिवाली तक रहा। अगले एक दो दिन हल्के बादल के बाद आसमान पूरी तरह से साफ हो जाएगा। पहाड़ों से बर्फीली हवाएं चलने से मैदानी क्षेत्रों में ठंडक बढ़ेगी। इस बीच हवा में नमी की मात्रा एक प्रतिशत बढ़कर 95 प्रतिशत रिकार्ड की गई।
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ऊसर भूमि में 20 नवंबर तक कर दें गेहूं की बुआई
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र कुमार ने ऊसर भूमि में गेहूं उत्पादन की आधुनिक तकनीक विषय पर एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने बताया कि यूपी में 13.69 लाख हेक्टेयर भूमि लवण और छार से प्रभावित है। कानपुर नगर, देहात, कन्नौज, इटावा, औरैया, उन्नाव, फर्रुखाबाद, कन्नौज, मैनपुरी समेत कई जनपदों में इस तरह की भूमि है। ऐसे में इन भूमियों पर हमेशा उचित नमी पर ही जुताई करें और बड़े-बड़े ढेलों को भुरभुरा कर दें।
मृदा परीक्षण की संस्तुति के आधार पर प्रति हेक्टेयर 200 किलोग्राम जिप्सम का प्रयोग करें। मृदा वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने बताया कि ऊसर भूमियों में बीज का जमाव कम होता है। ऐसे में संस्तुति मात्रा से सवा गुना ज्यादा बीज का प्रयोग करें। बीज का शोधन कार्बेंडाजिम से करें। ऊसर भूमियों में गेहूं की बुआई 20 नवंबर तक अवश्य कर दें। बीज पांच सेंटीमीटर से अधिक गहराई पर न डालें।