सीजोफ्रेनिया आनुवंशिक रूप से होने वाला मानसिक रोग है जो मस्तिष्क में डोपामिन रसायन की कमी और सिरोटोनिन रसायन के असंतुलन से होता है। वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. उन्नति कुमार ने बताया कि इसमें पागलपन जैसे दौरे पड़ते हैं।
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डेमो पिक
मरीज को मतिभ्रम होता है। मरीज रस्सी देखकर भी सांप समझने लगता है। उसे लगता है कि वह उसे मारेगा।
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डेमो पिक
कभी-कभी ईट-पत्थर मारने लगता है। ऐसे रोगी को शक होता है कि सब लोग उसके खिलाफ हैं। साजिश रचते हैं, उसे मारना चाहते हैं।
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डेमो पिक
रोगी को खतरनाक आवाजें सुनाई देती हैं। उसके व्यवहार में बदलाव आने लगता है और वह सामाजिक और व्यवसायिक दायित्वों को निभा नहीं सकता।
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डेमो पिक
10 प्रतिशत ऐसे मरीज आत्महत्या कर लेते हैं। 1 से 5 प्रतिशत मरीज दूसरों की हत्या कर देते हैं। खासकर महिला मरीजों को लगता है कि उनके मरने के बाद उनके बच्चे का कुछ नहीं हो पाएगा, इसलिए उसे भी मार डालती हैं।
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डेमो पिक
इस मर्ज का इलाज लंबा चलता है, इस वजह से भी कई बार मरीज हताशा में यह कदम उठा लेते हैं।
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डेमो पिक
यह आनुवांशिक रोग है इसलिए जिन माता-पिता को यह होता है उनके बच्चों में होने की आशंका 10 प्रतिशत रहती है। आमतौर पर 17 से 27 वर्ष की आयु में यह रोग सामने आता है। इस रोग के 30 फीसदी मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, 50 फीसदी मरीज आंशिक रूप से ठीक हो पाते हैं और 20 फीसदी मरीज कभी ठीक नहीं हो पाते।
ऐसे लक्षण होने पर परिजन ये करें
-परिजन ऐसे मरीज पर हर समय ध्यान दें
-मरीज की हताशा भरी बातों को गंभीरता से लें
-यदि मरीज मरने की बात करता है तो उससे उस बारे में विस्तार से बात करें, इससे उसमें यह प्रवृत्ति घटती है
-मरीज को बताना चाहिए कि वह उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, उनके बिना वह नहीं रह सकते, बीमारी सिर्फ दो माह की है, ठीक हो जाएगी, बाद में मरीज को लगेगा कि वह गलत सोच रहा था
-मरीज गंभीर हो तो बंदूक, रस्सी, बाथरूम में ब्लेड सहित अन्य खतरनाक चीजें उससे छिपाकर रखें