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'मुंहबोली मां' को भगा ले गया! और 8 साल डाकुओं के साथ रहा ये लड़का, कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Sat, 19 May 2018 04:22 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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श्याम जाटव की कहानी
खूंखार डकैत निर्भय गुर्जर ने 14 साल की उम्र में उस लड़के का अपहरण कर लिया था। मां-बाप फिरौती देने की हालत में नहीं तो करते क्या उसे उसके हाल में छोड़ दिया। आठ साल तक यह लड़का डाकुओं के गैंग में रहा उन्हीं के बीच रह कर जवान हुआ। उसको डाकू बता पुलिस ने दर्जनों मुकदमे दर्ज भी किए लेकिन अदालत ने उसे डाकू माना ही नहीं। इसलिए एक के बाद एक करके सभी मुकदमों से उसको बरी कर दिया। अब यह लड़का अपने परिवार के बीच आम इंसान की तरह जिंदगी गुजारेगा। हम बात कर रहे हैं श्याम जाटव की। 

आगे की स्लाइड में पढ़ें श्याम जाटव की पूरी कहानी...
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श्याम जाटव की कहानी
निर्भय गुर्जर द्वारा फिरौती के लिए श्याम जाटव का अपहरण किया गया था। बाद में करीब आठ वर्ष तक उसने गिरोह के लिए कार्य किया।श्याम जाटव को यह आजादी 10 मई 2018 को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष चल रहे अंतिम केस में बरी हो जाने के बाद मिली।
 
आगे की स्लाइड में पढ़ें श्याम कैसे हुआ बरी..
 
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श्याम जाटव की कहानी
खूंखार डकैत निर्भय गुर्जर द्वारा फिरौती के लिए अपहृत श्याम जाटव आठ वर्ष तक गिरोह में रहने व 14 वर्ष तक कानूनी प्रक्रिया के चलते जेल में बंद रहने के बाद अब सभी मामलों से बरी होकर खुली हवा में अपने बिछुडे़ मां-बाप के साथ जीवन यापन कर सकेगा। यह आजादी श्याम जाटव को 10 मई 2018 को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश औरैया के समक्ष चल रहे अंतिम केस में बरी हो जाने के बाद मिली। करीब 36 वर्षीय श्याम जाटव उर्फ श्यामा उर्फ श्याम सिंह पूर्व पता पी-27 भंगोलपुरी नई दिल्ली का बुरा समय उस समय शुरू हुआ था जब 14 मार्च 1996 को उसकी पकड़ दस्यु निर्भय सिंह गुर्जर गिरोह ने फिरौती के लिए की। फिरौती की रकम देने में बेबस उसके मां-बाप ने श्याम जाटव को अपने हाल पर छोड़ दिया। उस समय उसकी उम्र केवल 14 वर्ष की थी।
 
आगे की स्लाइड में पढ़ें- श्याम कैसे रहा निर्भय के संरक्षण में....
 

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निर्भय गुर्जर के बाल बनाता श्याम जाटव (पुरानी फोटो)
वह आठ वर्ष तक गैंग के खात्मे तक निर्भय के संरक्षण में बीहड़ में रहा। इस दौरान उस पर कानपुर, उरई, इटावा, औरैया, भिंड मध्य प्रदेश जिले के करीब 36 मुकदमे लग गए। दो नवंबर 2004 को श्याम जाटव ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर जान तो बचा ली। लेकिन खुली हवा में सांस लेने के लिए उसे 14 साल जेल में रहकर कानूनी प्रक्रिया से जूझना पड़ा। उसके अधिवक्ता फरहत अली खां, भूकेश मिश्रा, मो. सगीर कुरैशी व हिना कौसर का कहना है कि उसके मां बाप की पैरवी के कारण श्याम सभी 36 मुकदमों से बरी हुआ। 
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- श्याम जाटव के अलावा नीलम, निर्भय, लाठीवाला व सरला को भी नामजद...
 
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श्याम जाटव की कहानी
थाना अयाना में एक हत्या के मामले में उसे 10 मई 2018 को एडीजे लल्लू सिंह की कोर्ट से बरी कर दिया। इस मामले की कहानी कुछ इस तरह है कि पुलिस ने 14 अप्रैल 2004 को थाना अयाना क्षेत्र के सिहोली गांव के बीहड़ में दस्यु निर्भय सिंह गुर्जर को घेरकर फायरिंग की। अपने को घिरा देखकर निर्भय गैंग ने पकड़ विद्याराम दुबे की गोली मारकर हत्या कर दी और भाग गया। इस मामले में श्याम जाटव के अलावा नीलम गुप्ता, निर्भय सिंह गुर्जर, लाठीवाला व सरला जाटव को भी नामजद किया गया। श्याम जाटव की पत्रावली अलग कर मुकदमे का विचारण हुआ। दोनों पक्षों को सुनने के बाद एडीजे ने श्याम जाटव को दोषमुक्त कर दिया।
आगे की स्लाइड मेंः- लिखा पढ़ी में सरला जाटव उसकी पत्नी 
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श्याम जाटव की कहानी
लिखा पढ़ी में जेल में बंद गैंग में उसके साथ रही सरला जाटव उसकी पत्नी है। क्योंकि निर्भय गुर्जर ने बीहड़ में श्याम जाटव की शादी सरला जाटव के साथ कर दी थी। लेकिन उसका बाहर आना बहुत कठिन दिखाई देता है। उसे एक मामले में आजीवन कारवास भी हो चुकी है। वरिष्ठ अधिवक्ता महावीर शर्मा ने बताया कि सभी केसों से बरी श्याम जाटव अपने मां-बाप के पास राजस्थान में रह रहा है। कई फिल्म निर्माता उसकी जीवन शैली के आधार पर उसे रोल देने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अधिवक्ता भूकेश मिश्रा ने बताया कि अब सभी केसों से बरी होने के बाद श्याम जाटव शीघ्र ही फिल्मी दुनिया में कदम रखने की इच्छा व्यक्त कर चुका है।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः-नीलम गुप्ता की कहानी....
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नीलम की पुरानी फोटो
निर्भय गुर्जर ने अपनी आधी उम्र की नीलम गुप्ता को अपनी प्रेमिका बनाकर उससे शादी कर ली और अपने दत्तक पुत्र दस्यु श्याम जाटव के साथ नाबालिग और अपहृत सरला जाटव की धूमधाम से बीहड़ में सात फेरे करवा दिए थे लेकिन नीलम अपने हमउम्र श्याम जाटव के साथ निर्भय का साथ छोड़कर चली गई थी।  
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