साइबर ठगी करने वालों पर नकेल कसने के लिए यूपी के कानपुर शहर में कानपुर रेंज की पहली साइबर फॉरेंसिक लैब निर्माण को लेकर शासन की हरी झंडी मिल गई। बजट मिलने के बाद जल्द ही ट्रैफिक पुलिस लाइन में स्थित एसपी क्राइम दफ्तर में इसका निर्माण शुरू हो जाएगा। मौजूदा समय डिजिटल युग है। उच्च तकनीकों की मदद से अपराधी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे में पुलिस के लिए साइबर अपराधियों को पकड़ना और उन्हें सजा दिलाना बड़ी चुनौती है। साइबर अपराधियों की ऐसी ही चुनौतियों से निपटने को साइबर लैब बनाने की तैयारी की गई है।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- छह कमरों की लैब, 22 कर्मियों की होगी तैनाती...
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शासन को भेजे गए प्रस्ताव में आधुनिक मशीन, कम्प्यूटर, हाईटेक साफ्टवेयर के साथ ही तीन शिफ्टों में 22 प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती का मसौदा रखा गया। ट्रैफिक पुलिस लाइन स्थित एसपी क्राइम के दफ्तर परिसर में छह कमरों की लैब होगी। इसमें एक हाल में लैब बनेगी। बाकी में विवेचक और अधिकारियों का दफ्तर होगा। अधिकारी जनता की साइबर क्राइम से जुड़ी समस्याएं सुनेंगे और कार्रवाई की जाएगी।
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लैब खुलने से सीडीआर एनालिसिस, डेटा रिकवरी, दस्तावेज कलेक्शन, फाइल कार्विंग, ई-मेल ट्रेसिंग, मेमोरी ट्रेसिंग और मोबाइल फॉरेंसिक सॉल्यूशन, ईमेज मैचिंग, सेल टाइप एनालिसिस, फैराडे बैग तकनीक के जरिए बिना मोबाइल ऑन किए डाटा निकालने का काम हो सकेगा।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- कैसे काम करेगा साइबर लैब...
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साइबर अपराध अन्वेषण केंद्र में अपराधियों के मोबाइल और कंप्यूटर का डाटा लेकर उसे इन्वेस्टीगेट किया जा सकता है। इसके साथ ही ईमेल, सोशल साइट के जरिए होने वाले अपराध पर भी लगाम लग सकेगी।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- चुनिंदा साइबर उपकरणों का इस्तेमाल...
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साइबर लैब को छह सेक्शन में बांटा जाएगा, जिसमें हर सेल का एक इंचार्ज होगा। जनता से जुड़े साइबर क्राइम के मामलों का चुनिंदा साइबर उपकरणों की मदद से खुलासा किया जाएगा।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- लैब में ट्रेनिंग की भी होगी सुविधा...
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साइबर अपराध लैब में पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग और कोर्ट में साइबर इविडेंस दिखाने के लिए भी ट्रेनिंग दी जाएगी। साइबर जानकारों के अनुसार इन दिनों हथियार के बल पर लूटपाट से ज्यादा साइबर लूट के मामले बढ़ गए हैं।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- अधिक तकनीक का जानकार होना जरूरी...
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बदलते आधुनिक युग में पुलिस कर्मियों को भी तकनीक का जानकार होना पड़ेगा ताकि अपराधियों को डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पकड़ा जा सके। साइबर अपराध की जांच में मोबाइल और लैपटॉप महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य हैं। यह अपराधियों को पकड़ने और जानकारी जुटाने में सहायक होंगे।
आगे की स्सालाइड में पढ़ें- इबर कानून की सभी धाराओं का रहेगा चार्ट...
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साइबर लैब में साइबर कानून की सभी धाराओं में किस तरह से कार्रवाई करनी है या किस धारा के तहत दंड का क्या प्रावधान है, इसका एक चार्ट भी लगाया जाएगा। आमतौर पर साइबर क्राइम के मामले सीधे थाने में पहुंचते हैं। ऐसे में वहां के पुलिसकर्मियों को कार्रवाई करने में होने वाली दिक्कतों को दूर किया जा सकेगा।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- इन जिलों को होगा फायदा...
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कानपुर नगर, कानपुर देहात, औरैया, इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद के साइबर मामलों को सीधे निस्तारण हो सकेगा।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- नहीं करना होगा लंबा इंतजार...
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रेंज की साइबर फॉरेंसिक लैब का प्रस्ताव एसएसपी अखिलेश कुमार ने तैयार करवाया है। इस प्रस्ताव को शासन को भेजा था। शासन की हरी झंडी मिल गई है। - आलोक सिंह, आईजी रेंज
साइबर अपराध से जुड़े मामलों का खुलासा करने के लिए पुलिस को लखनऊ, आगरा और नोएडा स्थित साइबर फॉरेंसिक लैब की मदद लेनी पड़ती है। वहां से रिपोर्ट आने में पुलिस को लंबा इंतजार करना पड़ा है, जिसका सीधा फायदा अपराधियों को मिलता है। शहर में लैब बनाने के बाद अपराधों पर फंदा कसने में पुलिस को आसानी होगी।
- कंप्यूटर स्रोत और दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़- आईटी एक्ट धारा 65 - कंप्यूटर सिस्टम की हैकिंग और आकड़ों में हेरफेर- आईटी एक्ट धारा 66 - अश्लील सूचनाओं को वायरल करना- आईटी एक्ट धारा 67
- संरक्षित सिस्टम तक अनाधिकृत पहुंच- आईटी एक्ट धारा 70 - गोपनीयता को भंग करना- आईटी एक्ट धारा 72 - झूठी हस्ताक्षरित डिजिटल प्रमाणपत्रों को वायरल करना- आईटी एक्ट धारा 73 - ईमेल से धमकी भरे संदेश भेजना- आईपीसी की धारा 505 - ईमेल से अपमानसूचक संदेश भेजना- आईपीसी की धारा 499 - इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जालसाजी- आईपीसी की धारा 463 - फर्जी वेबसाइट और साइबर धोखाधड़ी- आईपीसी की धारा 420 - ईमेल स्पूफिंग- आईपीसी की धारा 463ए - वेब.जैकिंग- आईपीसी की धारा 383 - ईमेल का दुरुपयोग- आईपीसी की धारा 500