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जानिए बैंडिट क्वीन के जीवन से जुड़ी ऐसी घटनाएं जिनके बारे में जानकर उड़ जाएगी 'रातों की नींद'

Fri, 10 Aug 2018 05:41 PM IST
प्रतीक मिश्रा, कानपुर
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फूलन देवी

चंबल से निकलकर संसद तक का सफर तय करने वाली 'बैंडिट क्वीन' फूलन का आज जन्म दिन है। जानिए उनके जीवन से जुड़ी ऐसी घटनाएं, जो आपको झकझोर कर रख देंगी।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- जब दस की उम्र में चाचा से भिड़ने पर मिली शादी की सजा...

 

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फूलन देवी

10 अगस्त 1963 को यूपी में जालौन के 'घूरा का पुरवा' में फूलन का जन्म हुआ था। गरीब और ‘छोटी जाति’ में जन्मी फूलन में दब्बूपन नहीं था। उसने मां से सुना था कि चाचा ने उनकी जमीन हड़प ली थी। दस साल की उम्र में चाचा से भिड़ गई। जमीन के लिए धरना दिया। सजा तो मिलनी ही थी, उसी 10 साल की उम्र में उसकी शादी कर दी गई।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- अधेड़ उम्र के पति ने किया बलात्कार...

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फूलन देवी

अधेड़ उम्र के पति ने शादी की पहली रात से उसके साथ दरिंदगी शुरू कर दी, जो लंबे समय तक चली। उस आदमी ने फूलन से बलात्कार किया, फिर ये रोज का सिलसिला बन गया। जिसकी वजह से उसकी सेहत बिगड़ गई और उसे मायके आना पड़ा, उधर पति ने दूसरी शादी कर ली, फिर किस्मत ने एक और करवट ली।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- जब फूलन के प्यार में डाकू विक्रम ने की गुज्जर की हत्या...

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फूलन देवी

इसी दौरान फूलन के नए दोस्त बने, जिनमें से कुछ डाकू थे। गिरोह का सरदार बाबू गुज्जर उसे चाहता था। वहीं डाकू विक्रम मल्लाह भी फूलन से प्यार करता था। विक्रम और बाबू के बीच फूलन को लेकर ऐसी तनातनी हुई कि एक दिन विक्रम ने उसकी हत्या कर दी और गिरोह का सरदार बन गया, फिर फूलन और विक्रम साथ रहने लगे थे।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- जब फूलन ने की पति कि पिटाई...

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फूलन देवी

एक दिन फूलन अपने गिरोह के साथ पति के गांव गई। वहां उसने पति और उसकी बीवी दोनों की जमकर पिटाई की और अपने साथ हुए अपमान का बदला लिया।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- जब 22 ठाकुरों को मार कर लिया बलात्कार का बदला...

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फूलन देवी

1981 में फूलन बेहमई गांव लौटी। उसने उन दो लोगों की पहचान की, जिन्होंने उसका रेप किया था। जब गांव के लोगों ने इसकी जानकारी नहीं दी तो फूलन ने गांव से 22 ठाकुरों को निकालकर एक साथ गोली मार दी थी। यही वो हत्याकांड था, जिसने फूलन की छवि खूंखार डकैत की बना दी। चारों ओर बवाल कट गया, मीडिया ने फूलन को नया नाम दिया 'बैंडिट क्वीन'।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- जब फूलन ने किया आत्मसमर्पण...

 

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फूलन देवी - फोटो : file photo
सरकार की पहल पर भिंड के एसपी राजेंद्र चतुर्वेदी फूलन के गिरोह से बात करते रहे। ये उनका ही कमाल था कि फूलन आत्मसमर्पण को राजी हो गईं। मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने उसने सरेंटर किया। उस समय उन पर 22 हत्या, 30 डकैती और 18 अपहरण के चार्जेज थे।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- जब फूलन बनी सासंद और 2001 में लिया गया बेहमाई कांड का बदला...

 

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फूलन देवी
1996 में फूलन देवी ने समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा और जीत गईं। चम्बल में घूमने वाली अब दिल्ली के अशोका रोड के शानदार बंगले में रहने लगी। 25 जुलाई 2001 को शेर सिंह राणा फूलन से मिलने आया। नागपंचमी के दिन उनके हाथ से खीर खाई और फिर घर के गेट पर फूलन को गोली मार दी। फूलन की हत्या के बाद राणा ने कहा था कि उसने बेहमई कांड का बदला लिया है। 14 अगस्त 2014 को दिल्ली की अदालत ने शेर सिंह राणा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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बैंडिट क्वीन फूलन देवी
14 फरवरी 1981 को दस्यु सुंदरी फूलन देवी ने कानपुर देहात के बेहमही गांव में एक ही जाति के 20 लोगो को गोली मार कर उन सब की हत्या कर दी थी, जिसे प्रदेश का सबसे बड़ा नरसंहार कहा जाता है। जिसकी बेहमई गाँव में रहने वाले लोगों के दिलों में दहशत आज भी है।  फूलन देवी का कहना था उन्होंने ये हत्याएं बदला लेने के लिए की थीं।
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फूलन देवी पर बनी फिल्म बैडिट क्वीन का एक दृश्य (फाइल फोटो)
इसी बेहमई कांड के बाद फूलन देवी भारत और दूसरे देशों में चर्चा में आ गई थीं। फूलन की जिंदगी में बहुत सारे उतार-चढ़ाव रहे। इतने किस्से थे उसकी छोटी सी जिंदगी में कि फिल्म निर्माता शेखर कपूर ने उस पर फिल्म बना डाली। बैंडिट क्वीन (1994) ये फिल्म बहुत हिट हुई। बैंडिट क्वीन को सात फिल्म फेयर अवॉर्ड मिले थे।
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