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कोरोना के खौफ ने बिखेर दिया गुलजार रहने वाले गंगा बैराज पर सन्नाटा, सूने पड़े हैं पनकी और परमट मंदिर

Mon, 24 Aug 2020 11:19 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कोरोना काल से पहले और कोरोना काल के दौरान की गंगा बैराज और पनकी मंदिर की तस्वीरें - फोटो : amar ujala
कोरोना संकट से जूझते हुए पांच महीने बीत चुके हैं। कानपुर का प्रदेश में कोरोना से हो रही मौतों में पहला स्थान हैं। ऐसे में हम आपको कोरोना काल से पहले की और आज की तस्वीरों के जरिए कानपुर की उन जगहों से रूबरू कराने जा रहे हैं जहां कभी भीड़ रहती थी और अब कोरोना ने वहां मौत का सन्नाटा बिखेर दिया है। 

 
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कोरोना काल के दौरान सिद्धनाथ मंदिर में पसरा सन्नाटा - फोटो : amar ujala
देश में 24 मार्च को पहला एक दिवसीय जनता कर्फ्यू कोरोना को मात देने के लिए लगा था। इसके बाद 25 मार्च को देश में संपूर्ण लॉकडाउन लागू हो गया था। जोकि चरणबद्ध तरीके से खोला जा रहा है। हालांकि इस प्रक्रिया के साथ ही साप्ताहिक लॉकडाउन भी जारी है। चरणबद्ध तरीके से किए जा रहे इस अनलॉक से लोगों को काफी राहत मिली है।

 
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लॉकडाउन के दौरान कानपुर सेंट्रल पर पसरा सन्नाटा - फोटो : amar ujala
शहर में अभी धार्मिक स्थलों को आम जनता के लिए नहीं खोला गया है। कानपुर आईआईटी और शहर के प्रमुख मंदिरों में अभी भी सन्नाटा पसरा हुआ है। भक्त मंदिरों के प्रमुख द्वार से आकर वापस लौट जाते हैं। हालांकि जन्माष्टमी का पर्व कानपुर में धूमधाम से मनाया गया था लेकिन लोगों ने कोरोना के चलते घरों में ही रहना मुनासिब समझा।

 

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पनकी मंदिर में पसरा सन्नाटा - फोटो : amar ujala
कानपुर आईआईटी जो समय-समय पर होने वाले कार्यक्रमों से देश दुनिया में अपनी ख्याति फैला रहा था कोरोना काल में वो भी खामोश है। कोरोना की शुरुआत में ही आईआईटी ने अपने सभी छात्रों को उनके घरों को भेज दिया था। हॉस्टल खाली करवा दिए गए थे। 

 
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परमट मंदिर के मुख्यद्वार पर तैनात पुलिस - फोटो : amar ujala
पनकी मंदिर और परमट मंदिर जहां सुबह से लेकर शाम तक घंटा घड़ियाल की गूंज के साथ भजन कीर्तन हुआ करता था कोरोना काल में वहां भी सन्नाटा पसरा हुआ है। कानपुर में कोरोना के मरीजों की संख्या हर रोज बढ़ने की वजह से अभी धार्मिक स्थलों को खोलने की इजाजत नहीं है।
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