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जिंदगी से जंग हार गए एसपी सुरेंद्र दास, शोक में डूबा पुलिस महकमा, लखनऊ में होगा अंतिम संस्कार

Mon, 10 Sep 2018 10:11 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सुरेंद्र कुमार दास ने 12 बजकर 19 मिनट पर अंतिम सांस ली - फोटो : अमर उजाला
पांच दिन से मौत से जंग लड़ रहे एसपी सुरेंद्र कुमार दास ने रविवार को कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में 12 बजकर 19 मिनट पर अंतिम सांस ली। एसपी की मौत के बाद पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गयी। एसपी सुरेंद्र दास का अंतिम संस्कार लखनऊ में किया जाएगा। उनका शव पीजीआई के एकता नगर स्थित आवास में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। एसपी नार्थ विक्रम वीर ने मौके पर पहुंच कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
 
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सुरेंद्र कुमार दास ने 12 बजकर 19 मिनट पर अंतिम सांस ली - फोटो : अमर उजाला
सुरेंद्र दास कानपुर एसपी सिटी पूर्वी के पद पर तैनात थे। वह मूल रूप से बलिया के रहने वाले थे। पांच दिन पहले जहरीला पदार्थ खा लिया था। हालत बिगड़ने पर परिजन और पुलिसकर्मी उन्हें उर्सला ले गए। वहां से डॉक्टरों ने उन्हें सर्वोदय नगर स्थित रीजेंसी अस्पताल रेफर कर दिया। जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। पुलिस विभाग के आलाधिकारी एसपी का हालचाल लेने जाते रहे। रविवार 12 बजकर 19 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। आईपीएस की मौत की सूचना मिलते ही समूचा पुलिस विभाग व परिजन शोक में डूब गए।  मूलरूप से बलिया के भरौली निवासी सुरेंद्र कुमार दास (31) 2014 बैच के आईपीएस हैं।


 
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सुरेंद्र कुमार दास ने 12 बजकर 19 मिनट पर अंतिम सांस ली - फोटो : अमर उजाला
सल्फास खाने के बाद एसपी सुरेंद्र दास को बुधवार सुबह छह बजे रीजेंसी अस्पताल में भर्ती किया गया था। डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने में जुट गई थी। मुंबई से भी विशेषज्ञों की टीम विशेष लाइफ सपोर्ट सिस्टम लेकर आई। हालांकि सल्फास से निकलने वाली फास्फीन गैस शरीर में अपना दुष्प्रभाव छोड़ती रही। इसका असर शरीर की प्रत्येक कोशिका पर पड़ता रहा और उनकी मौत हो गई।


 
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सुरेंद्र कुमार दास ने 12 बजकर 19 मिनट पर अंतिम सांस ली - फोटो : अमर उजाला
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि सल्फास के असर से एसपी सुरेंद्र दास के सबसे पहले किडनी फिर लिवर फेल हुए थे। इसकी वजह से उनकी लगातार डायलिसिस की जाती रही। इसके बाद इसका दुष्प्रभाव उनके हार्ट पर पड़ा। उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था, लेकिन हालत बिगड़ती गई और बाई तरफ पैर में खून की सप्लाई बंद हो गई। इसे खोलने के लिए उनकी सर्जरी की गई थी लेकिन स्थिति और खराब होती चली गई।
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