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‘देखिए, यह माटी की गाड़ी एक पहिये पर कब तक चलती है’, जानिए, आखिर ऐसा क्यों बोले थे अटल

Fri, 17 Aug 2018 01:19 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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फूलबाग में सभा को संबोधित करते पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : अमर उजाला
अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की खबर सुनकर कानपुर भाजपा के शुरुआती दौर के जिलाध्यक्ष रहे गोपाल अवस्थी की आंखें छलक पड़ीं। अटल जी की बीमारी की गंभीर अवस्था पर जब वह अपने संस्मरण बता रहे थे, तभी पता चला कि अटल जी अब नहीं रहे। यह सुनकर उनके गले से आवाज नहीं निकल रही थी लेकिन आंखों से आंसू बरबस निकल रहे थे। इतनी देर में अटल जी के बारे में उन्होंने जितने भी संस्मरण अमर उजाला को बताए, उसके कुछ अंश...

 
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
1981 से 1987 तक भाजपा जिलाध्यक्ष रहे गोपाल अवस्थी ने बताया कि अटल जी किडनी की बीमारी से ग्रसित थे। तब उनका कुशलक्षेम पूछने के लिए पत्र भेजा गया था, उसका उन्होंने जवाब दिया था कि, ‘देखिए यह माटी की गाड़ी एक पहिये पर कब तक चलती है’। यह संस्मरण बताकर उनके आंसू छलक पड़े।

 
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
मुस्लिमों से बोले, अगर मैं अच्छा तो पार्टी भी अच्छी
गोपाल अवस्थी बताते हैं कि फूलबाग में अटल जी की जनसभा के पहले सर्किट हाउस में मुस्लिमों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलना चाहता था। उन्होंने यह बात बताई तो अटल जी ने उन्हें बुलवा लिया। पूर्व विधायक बाबूराम शुक्ला का मेस्टन रोड पर उठना बैठना था। तभी मकबूल चश्मे वाले ने अटल जी से मिलने की इच्छा जताई थी। मुस्लिमों ने अटल जी से कहा कि मुस्लिम समाज को आप पसंद हो, आपका व्यक्तित्व पसंद है लेकिन समाज आपकी पार्टी से परहेज करता है। तब उनका जवाब था कि अगर मैं अच्छा हूं तो पार्टी भी अच्छी है और पार्टी से जुड़ने को कहा था।

 

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
सुबह की पहली चाय बिना बिना दूध की पीते थे
अटल जी सुबह की पहली चाय बिना दूध वाली पीते थे। सर्किट हाउस में जब यह देख गोपाल अवस्थी मुस्कराए और इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि तुम भी पिया करो, पेट निकल रहा है तुम्हारा। इस बात का जिक्र उन्होंने विवेक सिनेमा में सुबह सात बजे हुए भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में भी कही थी। 

 
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : अमर उजाला
सभा में भीड़ केे मिजाज से बता देते थे चुनावी परिणाम 
अटल की राजनीतिक दूरदर्शिता ही थी कि वह सभा में उमड़ी भीड़ और उसके मिजाज को देखकर चुनाव का परिणाम बता देते थे। बांदा के तिंदवारी में हुए एक उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार बजरंग ब्रह्मचारी का प्रचार करने गए थे। सभा से वापसी के दौरान उन्होंने जिलाध्यक्ष गोपाल और संगठन मंत्री राजेंद्र अग्निहोत्री से चुनाव हारने की बात कही थी। कानपुर लौटते समय कुछ देर नदी के घाट पर मुंह हाथ धोए थे।


 
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : अमर उजाला
सेंट्रल पर बनवाया गया था खाना
तिंदवारी से लौटते समय उन्हें कानपुर सेंट्रल स्टेशन से दिल्ली की ट्रेन पकड़नी थी। तब उस समय भाजपा के मंडल अध्यक्ष रहे पूरन सेठ से अटल जी के खाने का इंतजाम करने को कहा गया। पूरन सेठ आठ दस महिला कार्यकर्ताओं, बर्तन और गैस सिलेंडर सेंट्रल लेकर पहुंच गए और स्टेशन की छत पर खाना बनवाया। जब अटल जी ने देखा तो वह हैरान होकर हंस दिए थे। अटल जी ट्रेन के सेंट्रल पर आने पर फौरन नहीं उतरते थे बल्कि अपनी सीट पर बैठे रहते थे। उन्हें रिसीव करने पहुंचे गोपाल अवस्थी ने जब बताया कि वह दूसरी बोगी में आपको देखने के लिए झांक रहे थे तो अटल जी ने मजाकिया लहजे में कहा था तांक-झांक कम किया करो।

 
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी

जब बारिश के कारण निरस्त हुई जनसभा
फूलबाग में 1986 में अटल जी की जनसभा होनी थी। बारिश ज्यादा होने की वजह से सभा निरस्त हुई और वह पूर्व सांसद ईश्वरचंद्र गुप्ता के घर पर संगठन के लोगों के साथ चर्चा कर रहे थे। तब एक भाजपा ने कद्दावर नेता ने अटल जी से कहा कि बारिश थम गई है और अभी भी 10 हजार लोग मैदान में हैं। अब उन्हें संबोधित की कीजिए। अटल जी ने जवाब दिया कि जिलाध्यक्ष अवस्थी से पूछो, गोपाल अवस्थी ने उन नेता से कहा कि, हमारा नेता एक लाख की जनता को संबोधित करता है और प्रस्ताव नहीं माना।
 
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
अब न पैदा होगा सुहृदय, सर्वग्राही, सर्वस्पर्शी नेता
अटल जी के व्यक्तित्व को याद करते हुए रो पड़े गोपाल अवस्थी ने कहा कि अब अटल जी जैसा सुहृदय, सर्वग्राही, सर्वस्पर्शी और बच्चों जैसा कोमल हृदय रखने वाला नेता कभी नहीं पैदा होगा। वह अपने राजनीतिक जीवन में अधिकतर समय विपक्ष में रहे। तब सत्ता भी ऐसी ही होती थी। कहावत यह भले हो कि जैसा राजा वैसी प्रजा। अटल जी कहते थे, सरकार का मुखिया जैसा होगा, वैसा ही विपक्ष होगा। तब एक दूसरे के प्रति सम्मान था अब सत्ता और विपक्ष में कटुता है।
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