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एक ऐसा सॉफ्टवेयर जो आंखों की फोटो से बताएगा डायबिटीज, सुरमा लगाने वाली महिलाओं के लिए चिंता की बात

Sat, 03 Nov 2018 11:46 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
कानपुर मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित कांफ्रेंस में आंखों की सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञों ने चर्चा की। लोगों को डायबिटीज से होने वाली आंख की बीमारी रेटिनोपैथी के कारण अंधता से बचाने के लिए देश भर में ‘ज्योति से ज्योति’ अभियान चलाने की जानकारी दी। इसमें अभियान से जुड़े लोग घर-घर जाकर मोबाइल फोन से आंखों की फोटो खींचकर सोसाइटी के सेंटर को भेजेंगे। अगर आंख में खराबी हुई, तो उन्हें एसएमएस या मेल आ जाएगा। 


 
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यूपी स्टेट ऑफ्थेलमोलोजिकल सोसाइटी की कांफ्रेंस में ऑल इंडिया ऑफ्थेलमोलोजिकल के अध्यक्ष (इलेक्ट) पदमश्री डॉ. एस नटराजन ने बताया कि अगर रेटिनोपैथी पहले पता चले, तो आंख की खराबी रोकी जा सकती है। कांफ्रेंस का आयोजन मेडिकल कॉलेज के सभागार में किया गया। डॉ. नटराजन ने बताया कि देश में 7 करोड़ लोगों को डायबिटीज है, इनमें 3 करोड़ को उनके रोग के बारे में पता ही नहीं है। जब लोगों की आंख की रोशनी चली जाती है, तो अस्पताल आते हैं।

 
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उन्होंने बताया कि अभियान में कम पढ़े लिखे, बेरोजगार लोगों को शामिल किया जाएगा। अकुशल लोगों को प्रशिक्षण देंगे। उनका काम आंख की फोटो खींच कर रीडिंग सेंटर में भेजना रहेगा। टाटा फाउंडेशन को ऐप तैयार करने को कहा गया है। इसके अलावा गूगल रेटिना में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सॉफ्टवेयर तैयार कर रहा है। कंप्यूटर काला मोतिया की पहचान करेगा। इसके अलावा 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे पर फ्री नेत्र शिविर लगेगा। डॉ. ललित वर्मा ने ग्लूकोमा के इलाज में आंख के अंदर लगाए जाने वाले इंजेक्शन, जीन-थेरेपी और चिप के बारे में बताया। डॉ. आरएन मिश्र ने रेटिनोपैथी के खतरों के संबंध में बताया। सोसाइटी के सचिव डॉ. मलय चतुर्वेदी ने ग्लूकोमा की पहचान के लिए गूगल द्वारा तैयार की जा रही आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के संबंध में जानकारी दी।

 

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बाइक सवार हेलमेट, पैदल चलने वाले चश्मा लगाएं
मुरादाबाद से कांफेंस में आए अपोलो आई हॉस्पिटल के डॉ. पल्लव अग्रवाल ने बताया कि प्रदूषण का आंखों पर भी बुरा असर पड़ता है। धूल कण, हानिकारक गैस आंखों में ड्राई आई और एलर्जी पैदा करते हैं। इससे आंखों में अल्सर हो सकता है और आंखें मलने से पुतली का आकार बदल सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि बाइक चलाने वाले प्रदूषण से बचने के लिए हेलमेट लगाएं। पैदल चलने वाले चश्मा लगाएं। आंखें रगड़ें नहीं, पानी से धोते रहें।

 
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महिलाएं आंखों के बाहर लगाएं सुरमा
महिलाएं मेकअप करते वक्त ध्यान रखें कि उनकी आंखों के अंदर काजल और सुरमा न जाए। इससे आंखों को नुकसान हो सकता है। वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एएम जैन और दूसरे विशेषज्ञों ने बताया कि एक ही स्टिक से कई महिलाएं काजल लगा लेती हैं। इससे संक्रमण हो सकता है। काजल को नीची और ऊपर की पलक के नीचे लगाना चाहिए। सुरमे मेें लेड होता है। इससे आंखों में अल्सर हो सकता है।

वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी भाटिया ने बताया कि आंख में लाली आने या किरकिरी होने पर मेडिकल स्टोर पर जाकर अपने मन से दवा न खरीदें। वायरल संक्रमण में अगर स्टेरॉयड डाल लिया तो दिक्कत कई गुना बढ़ जाएगी। इससे आंखें खराब हो सकती हैं। डाक्टरों ने बताया कि टीबी की एक-दो दवाएं आंखों के लिए हानिकर हैं। नर्व डैमेज होने से रोशनी कम होने लगती है। रोगी ऐसी दवाओं को विशेषज्ञों से बदलवा लें।

 
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