फूलन देवी एवं मां मूला देवी
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न्यायालय में फैसला टलने से रहते थे गुमसुम
बेहमई कांड के वादी राजाराम सिंह आरोपियों को सजा दिलाने के लिए पूरी तरह से संघर्ष करते रहे। वह हर तारीख पर कोर्ट जाते थे। घटना के बाद शुरुआती दौर में भी वह डकैतों से बेखौफ होकर पैरवी में लगे रहे। उस समय डकैतों का बीहड़ के आसपास गांवों में खासा आतंक था। बेटे रामकेश सिंह ने बताया कि न्यायालय में मूल केश डायरी न होने से फैसला टलने के बाद पिता गुमसुम रहने लगे थे। वह घटना में शामिल हर आरोपी को कड़ी सजा दिलाना चाहते थे। इस कारण पैरवी में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। मुकदमे में वह चश्मदीद गवाह भी थे।
बेहमई कांड के वादी के निधन की सूचना मिली है। राजस्व टीम व पुलिस के साथ मौजूद रहकर उनका अंतिम संस्कार कराया जाएगा। गांव में भीड़ उमड़ने की आशंका लेकर पुलिस को सतर्कता रखने के निर्देश दिए गए हैं।
लखनलाल राजपूत, तहसीलदार सिकंदरा