ब्रह्मलीन संत शोभन सरकार (स्वामी विरक्तानंद सरस्वती) के पिता और भाई ने शोभन आश्रम से जुड़े लोगों पर साजिश रच संत को मौत की नींद सुलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मौत की सीबीआई जांच के साथ ही प्रदेश सरकार से शिवली स्थित शोभन मंदिर को कब्जे में लेकर रिसीवर बैठाने की मांग की है। कहा है कि वहां शोभन सरकार का भव्य मंदिर बने और आश्रम की जमीन जनकल्याणकारी योजनाओं में इस्तेमाल की जाए।
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बाबा शोभन सरकार की मौत
- फोटो : अमर उजाला
कल्याणपुर के इंदिरा नगर में रहने वाले ब्रह्मलीन संत के बड़े भाई चंद्रभान तिवारी (74) का आरोप है कि 13 मई की सुबह 6:30 बजे शोभन सरकार को दूध दिया गया। दूध पीते ही उनके मुंह से झाग के साथ उल्टी आई और उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। बताया कि इसकी जानकारी उन्हें आश्रम से जुड़े लोगों ने दी है। उन्होंने मंदिर के सर्वराकार हरिशरण पांडेय पर पद का दुरुपयोग करने का भी आरोप लगाया है।
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बाबा शोभन सरकार की मौत
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कुछ वर्षों पहले भी रची गई थी साजिश
शोभन सरकार के 107 वर्षीय पिता कैलाश नारायण तिवारी ने बताया मंदिर से जुड़े लोगों ने कुछ वर्षों पहले भी उनके पुत्र को जहर देकर मारने की साजिश रची थी। उस वक्त वे कामयाब नहीं हो सके थे। उन्होंने कहा कि 13 मई को हुई उनके पुत्र की मौत संदेह के घेर में है। इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए।
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बाबा शोभन सरकार की मौत
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आश्रम से नहीं मिली मौत की सूचना
परिजनों ने बताया कि आश्रम से उन्हें शोभन सरकार की मृत्यु की कोई सूचना नहीं दी गई। यह जानकारी कुछ भक्तों और आसपास के ग्रामीणों ने फोन पर दी। मंदिर के मठाधीश शिवली आश्रम से उनके शव को सुनौड़ा स्थित आश्रम ले गए, जहां जल समाधि दी गई।
सर्वराकार को लेकर कमेटी में कोई विवाद नहीं
शोभन मंदिर के मुख्य पुजारी हरिशरण पांडेय ने बताया कि वह वर्ष-1980 में शोभन मंदिर आ गए थे। इसके बाद मंदिर में ही सेवा करते रहे। वर्ष 2008 में शोभन सरकार ने मंदिर का सर्वराकार बनाया था। इस बात की पुष्टि करते हुए शोभन मंदिर कमेटी के सदस्य रंजीतपुर के पवन तनय आश्रम के महंत गोपालानंद ने कहा कि सर्वराकार को लेकर कमेटी में कोई विवाद नहीं है। शोभन सरकार के परिवार के लोगों के आरोप की कोई जानकारी नहीं है।