सावन में पहली बार आनंदेश्वर बाबा का दरबार बंद है। बावजूद इसके भक्तों का कहना है कि बाबा के दर्शन न सही लेकिन सावन भर उनकी चौखट पर माथा टेकने अवश्य जाएंगे। सावन के पहले दिन सोमवार को शिव भक्तों ने घर में ही पूजा की वहीं कुछ भक्तों ने मंदिर के बाहर से महादेव के दर्शन किए। शहर में ऐसे लाखों भक्त हैं जो बाबा के दर्शनों के लिए परमट में सावन मास में नियमित जाते हैं। सोमवार के दिन तीन से चार लाख भक्त मंदिर में दर्शन करने को जाते हैं।
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पुलिस ने भक्तों को मंदिर जाने से रोका
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना संक्रमण के मद्देनजर सभी धार्मिक स्थल 31 जुलाई तक बंद हैं। शहर में भोले शंकर के आनंदेश्वर, वन खंडेश्वर, जागेश्वर, सिद्धनाथ आदि प्रमुख शिवालय सावन के पहले दिन बंद रहे। हालसी रोड निवासी व्यवसाई रवि शुक्ला 69 साल के हैं, वह पिछले 50 साल से आनंदेश्वर बाबा के नियमित दर्शन कर रहे हैं।
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मंदिर के बाहर से की पूजा
- फोटो : अमर उजाला
उनका कहना है कि उनकी याददाश्त में पहली बार ऐसा हो रहा है जब परमट मंदिर सावन में बंद है। सावन भर बाबा की चौखट पर माथा टेक कर पूजा करेंगे। सिविल लाइन निवासी श्री अग्रवाल 60 साल के हैं, वह पिछले 48 सालों से आनंदेश्वर बाबा के दरबार में जा रहे हैं। उनका कहना है इससे पहले कभी बाबा के दर्शन न मिले हों, याद नहीं पड़ता।
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मंदिर के बाहर से की पूजा
- फोटो : अमर उजाला
रात में ही आने लगे भक्त निराश लौटे
बाबा के भक्त रविवार देर रात ही परमट पहुंचने लगे। 12 बजे किसान नगर के दीपक ठाकुर और विशाल वर्मा को यूनियन बैंक तिराहे के पास बैरिकेडिंग पर पुलिस ने रोक लिया और कहा मंदिर बंद है, आप लोग अपने घर जाइए। दोनों बोले, पिछले 5 साल से सावन के पहले दिन हम लोग दर्शन करते आ रहे हैं। इस बार निराश लौट रहे हैं।
परमट मंदिर के आसपास की गई बैरिकेडिंग
भक्तों की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने रविवार देर रात परमट मंदिर में बैरिकेडिंग करा दी। इसके अलावा सभी शिवालयों में सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। एसपी पूर्वी राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि कोई मंदिर खुलेगा नहीं, फिर भी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। ग्वालटोली थाना प्रभारी विजय पांडे ने बताया की परमट मंदिर की तीनों सीमाओं को सील किया गया है। वीआईपी रोड से मंदिर जाने वाले रास्ते में बक्कल मैदान के पास बैरिकेडिंग की गई है। ग्रीनपार्क की ओर से आने वाले रास्ते में यूनियन बैंक तिराहे पर बैरियर लगाया है। वहीं गंगा नदी के पास भी पिकेट बैठा दी गई है। किसी भी भक्त को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।