सूर्यपुत्र शनिदेव 19 जनवरी यानी शनिवार सुबह 8:28 बजे उदय हो गए। ऐसे में अब शुभ कार्यों में और तेजी आएगी। शनि इस वर्ष 27 दिसंबर तक दिव्य स्वरूप में रहेंगे। मान्यता है कि उदय होने पर शनि कार्य ऊर्जा बढ़ाते हैं और न्याय करते हैं। साथ ही वह मेहनती लोगों को शुभ फल भी दिलवाते हैं। भाग्योदय में मदद करते हैं।
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महामहोपाध्याय डॉ.आदित्य पांडेय और आचार्य डॉ.प्रीति तिवारी ने बताया कि शनि 15 दिसंबर 2018 को अस्त हुए थे। 33 दिन बाद वह शनिवार को उदय हुए हैं। शनिदेव 30 अप्रैल से 18 सितंबर तक वक्री रहेंगे। इसके बाद मार्गी हो जाएंगे। चार माह तक उनका विशेष प्रभाव रहेगा।
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पूरे वर्ष राजनीतिक, न्यायिक और संवैधानिक क्षेत्रों में शनि का प्रभाव दिखाई देगा। उन्होंने बताया कि शनि अपने वलय की ऊर्जा से उदय या अस्त होते हैं। इस बार शनि के अस्त होने का समय 33 दिन रहा। वर्तमान में शनि धनु राशि और पूर्वाषाढ़ नक्षत्र पर गोचरस्थ हैं तथा 30 अप्रैल तक मार्गी रहेंगे। इसके बाद वक्री होंगे। उदय काल से शनि राहु का षड़ाष्टक योग बन रहा है। ऐसे में राजनीतिक दृष्टिकोण से यह वर्ष परिवर्तन और उठापटक वाला माना जा सकता है।
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19 जनवरी से 19 फरवरी तक परिवर्तन के प्रबल योग रहेंगे। मार्च में स्थितियां बदलेंगी। शनि का प्रभाव कारखानों के लिए लाभकारी होगा। परिश्रम करने वालों को लाभ होगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उत्तराषाढ़ एवं मूल नक्षत्र में शनि का प्रभाव अधिक होगा।
राशियों पर प्रभावः-
मेष- धन हानि, बीमारी में वृद्धि
वृष- आमदनी में बढ़ोतरी, कार्यक्षेत्र में नए अवसर
मिथुन- पति अथवा पत्नी को कष्ट, मानसिक तनाव
कर्क- शत्रुता में वृद्धि, धन हानि
सिंह- स्थान परिवर्तन, कार्य क्षेत्र में ठहराव
कन्या- आमदनी के नए स्रोत, अविवाहित के विवाह के अवसर
तुला- कार्यक्षेत्र में सकारात्मक बदलाव, आमदनी में बढ़ोतरी
वृश्चिक-शत्रुता में वृद्धि, बीमारियों के कारण तनाव
धनु- आध्यात्मिक उत्थान एवं आय के नए स्रोत
मकर- सर्वाधिक लाभप्रद, वाहन अथवा मूल्यवान वस्तुओं का लाभ
कुंभ- अत्यधिक लाभप्रद, स्थान परिवर्तन से लाभ
मीन- यात्रा के अवसर, आमदनी में बढ़ोतरी