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संजीत अपहरण हत्याकांड: मैं पुलिस के पैर छूता रहा और वो हर बार टालते रहे, अगर बेटे के बदले कोई जान मांगता तो दे देता...

Sun, 26 Jul 2020 09:27 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
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kanpur kidnapping case - फोटो : अमर उजाला
अगर मेरे बेटे के बदले कोई जान मांगता तो मैं वो भी दे देता। मैं हर बार पुलिस के पास जाकर उनके पैर छूता और वो हर बार टालते रहे। उनकी लापरवाही मेरे बेटे को खा गई...यह शब्द उस दुखी पिता के हैं, जिसके बेटे की पुलिस ने हत्या की खबर तो दे दी, लेकिन अभी तक उसका शव नहीं खोज पाए। शनिवार को बयान दर्ज करने पहुंचे एडीजी पीएचक्यू बीपी जोगदंड के सामने संजीत के पिता चमन यादव आप बीती बताते हुए फफक पड़े। 
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kanpur kidnapping case - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने न्याय की मांग की और दोषी पुलिसकर्मियों एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता, तत्कालीन सीओ मनोज गुप्ता व तत्कालीन इंस्पेक्टर रणजीत राय के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की। उन्होंने इन पुलिस कर्मियों को अपर्ह्ताओं के बाराबर का दोषी होने का आरोप लगाया। 
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kanpur kidnapping case - फोटो : amar ujala
पिता चमन सिंह ने बताया कि वो बेटे को खोजने केलिए पुलिस कर्मियों के पैरों पर गिर गए, लेकिन उन्हें तरस नहीं आया। पुलिस आज कल में टाल मटोल करती रही और हत्यारों ने मेरे बेटे की हत्या कर दी। बयान दर्ज कराने के दौरान पिता आपबीती बताते हुए कई बार बेहोश हो गए। एक बेबस, लाचार पिता की हालत देख अधिकारी भी मायूस से उठ कर चले गए।

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kanpur kidnapping case - फोटो : amar ujala
 संजीत की बहन रुचि व मां कुसुमा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। बहन सभी से चीख-चीख कर कहती रही ‘एक बार मेरे भाई की डेड बॉडी ही दिखला दो’...। रुचि ने सिसकते हुए कहा ‘भाई तुमने इस रक्षाबंधन पर समय से राखी बंधवाने का वादा किया था...और तुमने अपनी बहन से किया वादा तोड़ दिया’...। 
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kanpur kidnapping case - फोटो : amar ujala
मां कुसुमादेवी ने कहा ‘हे भगवान...मेरा सबकुछ छीनने केबाद भी मेरी सांसें क्यों चल रही हैं’। ‘काश कहीं से कोई आकर यह कह दे कि तुम्हारा बेटा जिंदा है’...। पिछले तीन दिनों से खाना पीना त्यागने के कारण संजीत के परिजनों की हालत बिगड़ रही है। शनिवार को भी रिश्तेदार और आस पड़ोस के लोग उन्हें ढांढस बंधाने आते रहे।
 
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kanpur kidnapping case - फोटो : amar ujala
घर के जानवर भी बेहाल
संजीत को व उसके परिजनों को जानवरों से बहुत लगाव था। बहन रुचि ने फफकते हुए बताया कि भाई एक तोते को लाया था। सुबह  मिट्ठू की ही आवाज सुन कर संजीत की आंख खुलती थी। इसके बाद संजीत मिट्ठू से काफी देर बात करता था। रुचि ने बताया संजीत के जाने के बाद से उनके तोते ने भी बोलना बंद कर दिया है।
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संजीत के घर पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
घर में एक गाय पली हुई है, जिसे रोटी देने के बाद ही संजीत घर से बाहर निकलता था। अब उसे रोटी खिलाने वाला उससे दूर चला गया। संजीत के जाने का एहसास इन बेजुबान जानवरों को ही, जिस कारण वो भी बेहाल हैं...यह कह कर रुचि रो पड़ी।
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