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जनसंख्या नियंत्रण के 'नियंत्रण' शब्द पर अभिनेत्री शबाना आजमी को एतराज, 'आपकी सोच बदल देंगी ये बातें'

Mon, 08 Oct 2018 08:28 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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फिल्म अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता शबाना आजमी - फोटो : अमर उजाला
कानपुर: फिल्म अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता शबाना आजमी ने कहा कि महिलाओं की स्थिति को लेकर समाज की सोच बदलने की जरूरत है। कक्षा दो और तीन की किताबों के अध्यायों में मां को अभी भी रसोई में ही दिखाया जाता है और पिता को दफ्तर में। यह भी तो दिखाया जा सकता है कि मां दफ्तर में और पिता रसोई में या फिर दोनों को दफ्तर में दिखाया जा सकता है। किताबों के इन अध्यायों के जरिये छोटे बच्चे की मानसिकता बनाई जाती है कि मां की जगह रसोई में ही है। महिलाओं को लेकर इस तरह का नजरिया बदले जाने के संबंध में उन्होंने संसद में भी बात उठाई थी।
 
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फिल्म अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता शबाना आजमी - फोटो : अमर उजाला
फेडरेशन आफ आब्सटेट्रिक एंड गायनोकोलोजिकल सोसाइटीज आफ इंडिया (फॉगसी) के बैनर तले जीएसवीएम मेडिकल कालेज में आयोजित डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू कॉन 2018 के महिला सशक्तीकरण फोरम में फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा कि बेटियां आज भी कोख में मारी जा रही हैं।
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फिल्म अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता शबाना आजमी - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के नियंत्रण शब्द पर एतराज जताया और कहा कि नियंत्रण शब्द में ही उत्पीड़न निहित है। इसके स्थान पर जनसंख्या स्थिरीकरण शब्द प्रयोग होना चाहिए। जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर महिलाओं को दवा की टोकरी बना दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए संकल्प लिया जाना चाहिए कि वर्ष 2050 तक लोग एक ही बच्चा पैदा करेंगे।


 

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फिल्म अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता शबाना आजमी - फोटो : अमर उजाला
शबाना आजमी ने महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया और कहा कि यह भी सोचना चाहिए कि महिलाओं को किस तरह की शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि तरक्की तभी हो सकती है जब महिला को इसका केंद्र बनाया जाए। महिलाएं स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देतीं।
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फिल्म अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता शबाना आजमी - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने मातृ मृत्यु दर के संबंध में कहा कि देश में जितनी महिलाओं की एक सप्ताह में मौत होती है, यूरोप में एक साल में मरती हैं। समाज के महत्वपूर्ण मामलों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। महिलाओं की सेहत पर उन्होंने चिंतन की जरूरत बताई और कहा कि कुंवारी लड़कियों और महिलाओं को योजना का केंद्र बिंदु बनाया जाना चाहिए।  
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