कानपुर के सचेंडी में हुए सड़क हादसे ने न केवल 15 परिवारों की खुशियां छीन लीं, बल्कि चूल्हे की आग भी ठंडी कर दी। मरने वाले लोगों के कंधों पर परिवार की बड़ी जिम्मेदारी थी, अब उनके मरने के बाद परिवार के सामने रोटी तक का संकट खड़ा हो गया है। कई तो अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले थे। मंगलवार को भी सभी रोजी रोटी कमाने निकले थे, लेकिन पलक झपकते ही काल के गाल में समा गए। जिन तीन सगे भाइयों की मौत हुई, उनके परिजनों ने बताया कि एक साथ तीनों नौकरी करते थे, जिससे घर का खर्च चलता था। एक-एक कर सभी की नौकरी फैक्टरी में लगी थी। इससे पूरा परिवार संतुष्ट था। मृतक सगे भाई गौरव और धनीराम के परिजन भी हादसे के बाद बेसुध हैं। घर की पूरी जिम्मेदारी इनके ही कंधों पर थी। एक साथ दोनों की मौत से पहाड़ टूट गया। यही हालात लगभग सभी मृतकों के परिवारों के हैं।
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कानपुर दर्दनाक हादसा
- फोटो : अमर उजाला
हाईवे किनारे खड़ी डीसीएम भी मौत का कारण
हाईवे किनारे खड़ी डीसीएम को भी हादसे की एक वजह बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाईवे किनारे खड़ी डीसीएम को क्रास करने के चक्कर में बस अनियंत्रित हुई और सामने आ रहे टेंपो से जा भिड़ी। जिस स्थान पर मंगलवार रात हादसा हुआ, वहां कल्याणी इंडेन गैस एजेंसी है।
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कानपुर हादसा
- फोटो : अमर उजाला
उसके पास पंचर और चाय-नाश्ते की दुकानें हैं। एक चालक भी अपनी डीसीएम हाईवे पर ही खड़ी कर नाश्ता करने चला गया। इससे तीन में से एक लेन बाधित हो गई। अंधेरे में बस चालक ने डीसीएम को ओवरटेक करने की कोशिश की। तभी सामने से टेंपो आ गया। घटना में डीसीएम भी टक्कर लगने से खंती में लुढ़क गई थी। इसके बाद दुकानदार धर्मेंद्र भी दुकान छोड़कर भाग गया।
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कानपुर सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला
खाई में फैले पड़े टिफिन और चप्पल बयां कर रहे थे हादसे की दास्तां
घटनास्थल पर पड़े टिफिन, चप्पलें, खून, कपड़े, बैग, वाहनों के क्षतिग्रस्त टुकड़े हादसे की भयावहता बयां कर रहे थे। तीनों वाहनों को तो हटा लिया गया, लेकिन वहां यात्रियों का सामान शाम तक पड़ा रहा।
कानपुर के सचेंडी में भीषण हादसा
- फोटो : अमर उजाला
हादसे के बाद बस के इंजन में लगी थी आग
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के कुछ देर बाद शार्ट सर्किट से बस के इंजन में आग लग गई। आग की लपटें उठती देख राहगीरों ने पानी और मिट्टी से आग पर काबू पाया। इधर बुधवार तड़के सचेंडी पुलिस क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त बस को खाई से निकालकर थाने ले गई।