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Sabarmati Express: धड़-धड़ की आवाज से कांप गया कलेजा, बाहर देखा तो धुंआ ही धुंआ, पढ़ें यात्रियों ने क्या कहा

Sun, 18 Aug 2024 07:57 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर ट्रेन हादसा - फोटो : amar ujala
कानपुर में रात ढाई बजे साबरमती ट्रेन जैसे ही पटरी से उतरी और धड़-धड़ की जोर की आवाज हुई तो यात्रियों को कलेजा कांप उठा। ऊपर की सीट पर सो रहीं महिलाएं और बच्चे नीचे आ गिरे, जिसने भी बाहर झांककर देखा तो घने अंधेरे के बीच सिर्फ धुंआ ही धुंआ दिखाई दे रहा था। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ट्रेन पटरी से उतरी है कि कोई बोगी पलटी है।

चारों ओर चीख-पुकार और हर कोई अपनी जान बचाने के लिए सामान छोड़कर गेट से कूदने में लग गया। कुछ देर बाद जब धुंआ छटा और यात्रियों को पता लगा कि सिर्फ बोगियां पटरी से उतरी हैं, किसी की जान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, तब बिना किसी मदद के दोबारा लोग बोगियों में घुसे और अपना अपना सामान लेकर फिर से बाहर आकर मदद का इंतजार करने लगे।
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कानपुर ट्रेन हादसा - फोटो : amar ujala
भगवान ने जान बचा ली
परिवार के साथ अयोध्या से सूरत जा रहे संदीप तिवारी ने बताया कि सभी लोग सो रहे थे, तभी जोर की आवाज के बाद पूरी बोगी में चीखपुकार मच गई। लोग एक-दूसरे को धक्का देते हुए किसी तरह बोगी से उतरे। बस यह समझिए कि भगवान ने जान बचा ली।
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कानपुर ट्रेन हादसा - फोटो : amar ujala
दहशत में गिट्टियों पर कूद गई
एसी कोच में सो रहीं इंदौर निवासी प्रीति श्रीवास्तव अहमदाबाद जाने के लिए ट्रेन पर सवार थीं। बताया कि आवाज इतनी जोर की थी कि लगा कोई बोगी जरूर पलट गई है, बाहर आकर देखा तो बोगी बेपटरी हो चुकी थी। वह गेट से सीधे गिट्टियों पर ही कूद पड़ी थीं।

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कानपुर ट्रेन हादसा - फोटो : amar ujala
पूरी बोगी में मची थी चीखपुकार
अयोध्या से अहमदाबाद जा रहे रामाशीष मौर्य ने बताया कि तेज आवाज के साथ पूरी बोगी हिल गई थी। पूरी बोगी में महिलाओं और बच्चों की चीखें ही सुनाई दे रहीं थीं। बड़े अफसोस की बात है कि काफी देर तक हम लोगों की मदद के लिए भी कोई नहीं पहुंचा।
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train accident - फोटो : amar ujala
कोई कुछ बताने वाला भी नहीं था
अहमदाबाद निवासी प्रीति सिंह का कहना है कि आवाज से यह तो लगा कि बोगी पटरी से उतरी है, लेकिन रेलवे की ओर से कोई कुछ बताने वाला नहीं था। कैसे हम लोग बोगी से कैसे नीचे उतरे हैं, हम ही जानते हैं। घबराई महिलाएं व बच्चों को चीखता देखना भी आसान नहीं था।
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