कानपुर में रात ढाई बजे साबरमती ट्रेन जैसे ही पटरी से उतरी और धड़-धड़ की जोर की आवाज हुई तो यात्रियों को कलेजा कांप उठा। ऊपर की सीट पर सो रहीं महिलाएं और बच्चे नीचे आ गिरे, जिसने भी बाहर झांककर देखा तो घने अंधेरे के बीच सिर्फ धुंआ ही धुंआ दिखाई दे रहा था। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ट्रेन पटरी से उतरी है कि कोई बोगी पलटी है।
चारों ओर चीख-पुकार और हर कोई अपनी जान बचाने के लिए सामान छोड़कर गेट से कूदने में लग गया। कुछ देर बाद जब धुंआ छटा और यात्रियों को पता लगा कि सिर्फ बोगियां पटरी से उतरी हैं, किसी की जान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, तब बिना किसी मदद के दोबारा लोग बोगियों में घुसे और अपना अपना सामान लेकर फिर से बाहर आकर मदद का इंतजार करने लगे।