किसी भी राजनीतिक दल की जड़ें जमाने, बेहतर प्रत्याशियों के चयन और चुनाव प्रबंधन में स्थानीय संगठन की भूमिका सबसे अहम होती है। हालांकि चुनाव दर चुनाव अब राजनीतिक दलों के संगठनों की भूमिका सिमटती जा रही है। लगभग सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के चुनाव कार्यालय तो कई बनते हैं, लेकिन सबसे प्रमुख उनके अपने आवास या फिर मनचाही जगह पर होते हैं। चुनाव प्रबंधन भी संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों के बजाय उनके परिवार के लोग ही संभालते हैं।
विज्ञापन
2 of 5
लोकसभा चुनाव (फाइल फोटो)
प्रत्याशियों के दिनभर के चुनाव प्रचार का कार्यक्रम घर पर बने कार्यालय से ही तय होता है। पार्टियों के मुख्यालयों में कहने को तो केंद्रीय कार्यालय बनते हैं, लेकिन इनमें थोड़ी-बहुत मात्रा में प्रचार-सामग्री और इक्का-दुक्का कार्यकर्ता ही मिलते हैं।
विज्ञापन
3 of 5
लोकसभा चुनाव 2019
- फोटो : अमर उजाला
वरिष्ठ पत्रकार मनोज त्रिपाठी बताते हैं कि 1990 के बाद राजनीतिक दलों के संगठनों की भूमिका सीमित होनी शुरू हो गई थी। इसकी वजह समझना कोई मुश्किल नहीं था। दरअसल इससे पहले अपवाद स्वरूप कुछ मामलों को छोड़ दें तो लगभग सभी चुनाव में प्रत्याशियों के चयन में संगठन की प्रमुख भूमिका होती थी। संगठन ही कानपुर के एक-दो सबसे मजबूत दावेदारों का नाम तय कर आलाकमान को भेजता था। इन्हीं में से किसी का चयन किया जाता था।
4 of 5
अमर उजाला पर पढ़िए चुनाव से जुड़ी हर खबर
- फोटो : Amar Ujala
इससे उस प्रत्याशी को जिताने की जिम्मेदारी भी संगठन पर ही आ जाती थी। पार्टी के कार्यालय से ही पूरा चुनाव लड़ा जाता था। संगठन के पदाधिकारी ही प्रत्याशी के कार्यक्रम तय करते थे। इससे संगठन का महत्व बना रहता था। समय के साथ प्रत्याशियों का चयन सीधे आलाकमान से होने लगा। वर्तमान चुनाव में भी भाजपा और सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी सीधे आलाकमान से तय हुए। प्रत्याशियों के चयन में संगठन की भूमिका सिमटी तो बाकी कामों में भी उनकी पूछ खत्म होने लगी।
पार्टी में अंदरखाने खींचतान की आशंका में प्रत्याशी चुनाव प्रबंधन भी खुद करवाने लगे। 2004 के चुनाव में भाजपा के सत्यदेव पचौरी, 1999 से कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल का कार्यालय उनके आवास में बनता रहा। हाजी मुश्ताक सोलंकी ने बड़ा चौराहा पर अपना कार्यालय बनवाया। वहीं से चुनाव संचालित हुआ। चुनाव प्रबंधन भी उनके परिजनों ने ही संभाला। पार्टी निष्ठा के चलते संगठन अपनी सक्रियता दिखाते रहते हैं।