यूपी के बांदा जिले में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना ने सभी काे चाैका के रख दिया। खुले आसमान तले धूप की तपिश में करीब 70 दिन तक फसल काटने की तीन कुंतल अनाज की मजदूरी पाकर लक्ष्मिनिया, लीला और तुलसा खुशी थीं। पूरे साल चूल्हा जलाने का उनका इंतजाम हो गया था।
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ट्राली एक्सीडेंट में घायल लाेग
70 दिन की मजदूरी में मिला था 3-4 कुंतल यही अनाज उनकी मौत का सामान बन गया। ट्राली पलटी तो अनाज की बोरियों में दबकर तीनों की मौत हो गई। बोरियों का अनाज वहीं फैल गया। मृतक और घायलों के परिवार हर साल फसल काटने मजदूरी पर जाते हैं। उन्हें गेहूं काटने की मजदूरी अनाज के रूप में मिलती है।
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ट्राली एक्सीडेंट
मृतक लक्ष्मीनिया के भाई बारेलाल ने बताया कि 20 गठ्ठर की कटाई में एक गठ्ठर मजदूरी मिलती है। लक्ष्मीनिया को चार कुंतल गेहूं मिला था। सयानी बेटी विनीता की शादी के लिए वह लगातार मजदूरी कर रही थी। कटाई में मिला अनाज इन मजदूरों को साल भर का राशन होता था। कमोबेश यही घरेलू परिस्थितियां मृतक तुलसा और लीला की थीं।
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एक्सीडेंट में घायल
मंगलवार को पूरी फसल कट जाने के बाद खेत मालिक ने सभी मजदूरों का उनकी मजदूरी का अनाज देकर ट्रैक्टर से उन्हें विदा किया था। बदौसा प्रतिनिधि के मुताबिक, उसरा पुरवा से लीला अपने बच्चे और पति गामा के साथ फसल काटने गई थी।
लीला के कच्चे खपरैलदार मकान में दरवाजा भी नहीं है। पैबंद वाली टाट फट्टी का पर्दा डालकर लकड़ी से रोक लगा रखी है। तीनों मृतकों समेत लगभग सभी मजदूरों के बच्चों का नामांकन गांव के परिषदीय स्कूल में है लेकिन कटाई में मदद के लिए इन बच्चों को भी साथ ले गए।