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कोरोना योद्धा: ये बच्चों को छोड़कर कर रहीं संदिग्धों की सेवा, वीडियो कॉलिंग पर देतीं दिलासा- फर्ज पूरा कर रही हूं, जल्द आऊंगी

Mon, 22 Jun 2020 08:01 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
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डॉक्टर शाईंदा हसन - फोटो : अमर उजाला
‘मम्मी, आपके पास अभी नहीं आ सकती। मैं अपना फर्ज पूरा कर रही हूं। 24 घंटे ड्यूटी है। छुट्टी की परमीशन नहीं मिल रही है। अललफलाह और अलस्सलाह (दोनों बेटों) को भी मिस कर रही हूं’। सोमवार (22 जून) को सुबह फोन पर हुई बातचीत का यह अंश बांदा की बेटी और नोएडा में गलगोटिया कॉलेज के क्वारंटीन सेंटर की प्रभारी डॉक्टर शाईंदा हसन (एमबीबीएस) और यहां रह रहीं उनकी मां फहमीदा के बीच हुई बातचीत का है।
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डॉक्टर शाईंदा हसन - फोटो : अमर उजाला
शहर के अलीगंज निवासी और बिल्डिंग मैटेरियल व्यवसायी निसारूल हसन की बेटी शाईंदा हसन नोएडा स्थित गलगोटिया कॉलेज में बनाए गए कोविड-19 क्वारंटीन सेंटर की प्रभारी हैं। वह नोएडा के भंगेल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में आपातकालीन चिकित्साधिकारी (ईएमओ) पद पर नियुक्त हैं। मार्च से उन्हें क्वारंटीन सेंटर का प्रभारी बना दिया गया है।

 
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बेटे अललफलाह और अलस्सलाह - फोटो : अमर उजाला
24 घंटे कोरोना संक्रमितों और संदिग्धों के बीच ड्यूटी कर रही हैं। तीन माह से सेंटर पर ही हैं। घर नहीं जा पा रहीं। शाईंदा ने अपने दोनों बेटों सात वर्षीय अललफलाह अहमद और तीन वर्षीय अलस्सलाह अहमद को मार्च में ही बांदा अपने मायके भेज दिया था। तब से दोनों अपने नाना-नानी के पास है। मामा अलहयात (बीटेक इंजीनियरिंग छात्र) दोनों भांजों को पढ़ाता और उनके साथ खेलता है।

 

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डॉक्टर शाईंदा हसन का परिवार - फोटो : अमर उजाला
मां शाईंदा और दोनों बच्चे के बीच अक्सर वीडियो कॉलिंग से बातचीत होती है। शाईंदा हर रोज उनको यही दिलासा देतीं हैं कि जल्द आएंगी। हालांकि मां से असलियत बयां कर देतीं हैं कि छुट्टी नहीं मिल रहीं। मां-बेटी और मां-बेटों के बीच आए दिन होने वाली इस बातचीत के दौरान दोनों की आंखों में आंसू आ जाते हैं। एमबीबीएस करने के बाद शाईंदा की पहली पोस्टिंग हमीरपुर जिले में वर्ष 2015 में प्रभारी चिकित्साधिकारी पद पर हुई। कुछ ही बाद उनका तबादला नोएडा हो गया। तब से वहीं है। पति फिरोज अहमद इंजीनियर हैं। इन दिनों मालद्वीप में हैं। लॉकडाउन की वजह से नहीं आ सके।
 
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डॉक्टर शाईंदा हसन - फोटो : अमर उजाला
शाईंदा की सास कैंसर पीड़ित हैं। कोविड डूयटी में इतनी अधिक व्यस्त हैं कि सास की भी सेवा नहीं कर पा रहीं। शाईंदा का कहना है कि वह अपना फर्ज निभा रहीं हैं। इस काम में उन्हें पति, मायके और अपने मासूम बच्चों का पूरा सहयोग मिल रहा हैं। जिले की वरिष्ठ महिला चिकित्सक चिराग फाउंडेशन संयोजक डॉ. शबाना रफीक ने शाईंदा को शाबासी दी है।
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