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बैंडिट क्वीन की 'आंखों में थी ज्वाला', यहां देखिए फूलन देवी की दस दुर्लभ तस्वीरें

Sat, 10 Aug 2019 04:13 PM IST
शिखा पांडेय शिखा पाण्डेय, अमर उजाला, कानपुर
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फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
चंबल के बिहड़ों से देश की संसद तक का सफर तय करने वाली महिला जो कभी खूंखार डकैतों में शुमार होती थी आज उनका जन्मदिन है। फूलन देवी एक ऐसा नाम जिसकी मर्जी के बिना बीहड़ का पत्ता भी नहीं हिलता था। फिर समय ने ऐसी करवट ली कि 'बैंडिट क्वीन' फूलन देवी देश की संसद तक पहुंचीं।
जानिए फूलन देवी के जीवन से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें साथ ही देखिए उनकी ये दुर्लभ तस्वीरें...
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फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
'बैंडिट क्वीन' फूलन देवी के नाम की इतनी दहशत थी कि बड़े-बड़े लोगों की रूह कांपने लगती थी। कहा जाता था कि वह बहुत कठोर दिल वाली थी। हालांकि इसके पीछे बहुत बड़ा कारण था।


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फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
यह कहना भी गलत नहीं होगा कि फूलन को हालात ने इतना कठोर बना दिया कि उन्होंने बहमई में सामूहिक हत्याकांड को अंजाम दिया। फूलन ने एक साथ लाइन में खड़ा कर 22 ठाकुरों की हत्या कर दी। इसका उन्हें जरा भी अफसोस नहीं हुआ।

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फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
फूलन ने अपनी छोटी सी जिंदगी में तमाम दुख झेले। यही वजह थी कि यूपी (जालौन) के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाली ये औरत केवल भारत ही नहीं विदेश में भी चर्चित हो गई।
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फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
जुर्म की दुनिया छाेड़कर राजनीति में आई फूलन को लाेगाें ने संसद तक पहुंचाया। चंबल के बीहड़ों से संसद पहुंचने वाली फूलन देवी पर ब्रिटेन में आउटलॉ नाम की एक किताब प्रकाशित हुई, जिसमें उनके जीवन के कई पहलुओं पर चर्चा की गई है।
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फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
फूलन देवी को मिली जेल की सजा के बारे में पढ़ने के लिए लेखक रॉय मॉक्सहैम ने 1992 में उनसे पत्राचार शुरू किया। जब फूलन देवी ने उनके पत्र का जवाब नहीं दिया तो रॉय मॉक्सहैम भारत आए और उन्हें फूलन देवी को करीब से जानने का मौका मिला।
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फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
फूलन देवी का जन्म यूपी के जालौन के पास बने एक गांव पूरवा में 10 अगस्त 1963 में हुआ था। इसी गांव से उसकी कहानी भी शुरू होती है। जब फूलन 11 साल की हुई, तो उसके चचेरे भाई मायादिन ने उसको गांव से बाहर निकालने के लिए उसकी शादी पुत्ती लाल नाम के बूढ़े आदमी से करवा दी।

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फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
फूलन के पति ने शादी के तुरंत बाद ही उसके साथ दुष्कर्म किया और उसे प्रताड़ित करने लगा। परेशान होकर फूलन पति का घर छोड़कर वापस मां-बाप के पास जाकर रहने लगी। फूलन 15 साल की थी जब कुछ दबंगों ने घर में ही उसके मां-बाप के सामने उसके साथ गैंगरेप किया और अप्राकृतिक संबंध बनाए। इसके बावजूद फूलन के तेवर कमजोर नहीं पड़े।

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फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
उसके बाद गांव के दबंगों ने एक दस्यु गैंग को कहकर फूलन का अपहरण करवा दिया। यहीं से शुरू हुआ फूलन के डकैत बनने की कहानी। फूलन ने 14 फरवरी 1981 को बेहमई गांव में 20 ठाकुरों को लाइन में खड़ा करके मारी गोली मार दी।
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फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
1994 में जेल से रिहा होने के बाद वह 1996 में सांसद चुनी गईं। समाजवादी पार्टी ने जब उन्हें लोक सभा का चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया तो काफी हो हल्ला हुआ।  2001 में केवल 38 साल की उम्र में दिल्ली में घर के सामने ही फूलन देवी की हत्या कर दी गई थी।
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